न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में “उभरते तंबाकू एवं निकोटिन उत्पादों से सुरक्षा: चुनौतियाँ एवं आगे की राह” विषय पर राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जहां उन्होंने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए कानून प्रवर्तन और जागरूकता को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि “झारखंड में पान मसाला, तंबाकू और गुटखा की वजह से हर साल हजारों युवा ओरल कैंसर जैसी घातक बीमारी का शिकार हो रहे हैं. यह सिर्फ चिंता नहीं, गंभीर चेतावनी है. मैं बहुत जल्द इस पर कड़ा एक्शन लेने जा रहा हूँ.” उन्होंने युवाओं से अपील किया कि “किसी भी तरह की नशे की आदत से दूर रहें. सादा पान मसाला नाम का ‘सादा’ नहीं है — यह आंखों में धूल झोंकने जैसा है. कई ब्रांड तंबाकू मिलाकर बड़े पैमाने पर बेच रहे हैं, जिससे युवा बर्बाद हो रहे हैं.”
बहुत जल्द राज्यभर में चलेगा व्यापक छापामारी अभियान
मंत्री ने साफ कहा कि राज्य सरकार तंबाकू माफिया पर शिकंजा कसने जा रही है. “बहुत जल्द राज्यभर में सशक्त छापामारी अभियान चलाया जाएगा और इस घातक व्यापार पर कठोर रोक लगाई जाएगी. युवाओं का जीवन बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.”
सेमिनार का उद्देश्य युवाओं को तंबाकू एवं निकोटिन के खतरनाक प्रभावों के प्रति जागरूक करना, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम 2019 के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देना तथा निकोटिन पाउच जैसे उभरते उत्पादों के वैश्विक नियामक अनुभवों को साझा करना था.
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. अपने प्रेरक उद्घाटन वक्तव्य में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा, “देश की युवा शक्ति को नशे की जद से बाहर रखना हमारी जिम्मेदारी है. यहां बैठे युवा कल के वकील और जज हैं — समाज आपसे उम्मीद के साथ देखता है. नशे की लत में सैकड़ों जानें जा रही हैं, इसलिए विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका — तीनों के समन्वित प्रयास बेहद जरूरी हैं.”
उन्होंने युवाओं से कहा कि सशक्त कानून तभी असरदार होते हैं जब उनका ईमानदारी से पालन और क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए. विशिष्ट अतिथि डॉ. एल. स्वस्तिचरण, उप महानिदेशक एवं निदेशक (EMR), स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार ने देश में उभरते निकोटिन उत्पादों के नियमन की चुनौतियों, खामियों और आगे की दिशा पर विस्तार से प्रकाश डाला.
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ताओं ने रखे महत्वपूर्ण विचार
- वंदना शाह, उपाध्यक्ष, CTFK – निकोटिन पाउच के वैश्विक नियामक ढाँचे और विभिन्न देशों में लागू नीतियों की जानकारी दी.
- प्रवीण सिन्हा, एनपीओ, WHO – उभरते तंबाकू एवं निकोटिन उत्पादों के स्वास्थ्य जोखिमों और वैश्विक ट्रेंड्स पर महत्वपूर्ण प्रस्तुति दी.
- गौरव गुप्ता, सीनियर रिसर्च कंसल्टेंट, CTFK – NRTs व ONPs से जुड़े भारत में किए गए सर्वेक्षणों के अहम निष्कर्ष साझा किए.
- रंजीत सिंह, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट – ई-सिगरेट निषेध अधिनियम 2019 के प्रवर्तन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और समाधान पर चर्चा की.
- डॉ. अश्विनी कुमार, SNO-NTCP, झारखंड – राज्य स्तर पर चल रही तंबाकू नियंत्रण पहलों का विवरण प्रस्तुत किया.
- डॉ. सिद्धार्थ सेन्याल, निदेशक-इन-चीफ, स्वास्थ्य सेवाएँ, झारखंड – निकोटिन उत्पादों के उपयोग के आँकड़े और राज्य में बढ़ती चुनौतियों पर प्रकाश डाला.
- कार्यक्रम का समापन डॉ. आनंदकुमार आर. शिंदे, एसोसिएट प्रोफेसर, NUSRL, द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.
ये भी पढ़ें- विधानसभा के प्रभारी सचिव माणिक लाल हेंब्रम हुए सेवानिवृत, रंजीत कुमार बने विधानसभा के प्रभारी सचिव