चैनपुर के अकडाही में 24 एकड़ से अधिक जमीन को लेकर विवाद, पीड़ित परिवार पहुंचे डीसी दरबार

चैनपुर के अकडाही में 24 एकड़ से अधिक जमीन को लेकर विवाद, पीड़ित परिवार पहुंचे डीसी दरबार

चैनपुर के अकडाही में 24 एकड़ से अधिक जमीन को लेकर विवाद पीड़ित परिवार पहुंचे डीसी दरबार

न्यूज11 भारत
पलामू/डेस्क:
पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हरभोगा अकडाही के पीड़ित हरिजन भुइयां समाज के लोगों ने वर्षों पुराने भूमि विवाद से तंग आकर अंततः जिला मुख्यालय मेदिनीनगर में उपायुक्त से मुलाकात की है. पीड़ितों ने उपायुक्त को एक लिखित आवेदन सौंपकर अपनी पैतृक व खतियानी जमीन को दबंगों द्वारा अवैध रूप से लूटने, जातिसूचक शब्द कहकर प्रताड़ित करने और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है. काफी लंबे समय से अंचल और स्थानीय स्तर पर न्याय के लिए भटक रहे इन गरीब परिवारों ने थक-हारकर जिला प्रशासनिक प्रधान की चौखट पर दस्तक दी है और मामले में त्वरित कानूनी हस्तक्षेप की मांग की है.

इस मामले को लेकर पीड़ितों का कहना है कि चैनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम अकडाही में स्थित खाता संख्या शून्य नौ के विभिन्न प्लॉटों की लगभग चौबीस एकड़ पंचानवे डीमिल खतियानी भूमि का यह विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि कई सालों से लगातार चल रहा है. पीड़ितों का आरोप है कि शाहपुर ग्राम के रहने वाले ओम प्रकाश गुप्ता, जयप्रकाश गुप्ता, प्रदीप कुमार गुप्ता, संतोष कुमार गुप्ता, दिलीप कुमार गुप्ता, राजू गुप्ता, बिनोड कुमार गुप्ता, प्रेमन कुमार गुप्ता, दिनेश कुमार गुप्ता, बन्टी गुप्ता, राजन कुमार गुप्ता और अर्जुन कुमार गुप्ता नामक व्यक्ति पिछले कई वर्षों से इस जमीन पर अपना हक जता रहे हैं. पीड़ितों का कहना है कि विपक्ष के द्वारा कथित रूप से गलत और फर्जी कागजात तैयार करवाकर इस खतियानी जमीन को हड़पने का प्रयास किया जा रहा है, 

जबकि दूसरी तरफ विपक्षी दल भी इस जमीन पर अपना दावा ठोक रहा है.
उपायुक्त के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विपक्षियों द्वारा उनकी जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा है और जब भी वे इस जबरन दखलअंदाजी का विरोध करते हैं, तो उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर सरेआम गाली-गलौज की जाती है. पीड़ितों का कहना है कि वे सालों से न्याय के लिए स्थानीय स्तर पर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण विपक्षियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं. 

अब नौबत यहां तक आ पहुंची है कि  विपक्षीयों द्वारा उन्हें लगातार झूठे मुकदमों में फंसाने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे पूरा हरिजन परिवार गहरे खौफ के साए में जीने को मजबूर है. सालों से चल रहे इस मानसिक और आर्थिक शोषण से पूरी तरह टूट चुके पीड़ित परिवारों ने उपायुक्त से बेहद भावुक अपील करते हुए कहा कि वे समाज के अत्यंत गरीब तबके से आते हैं और यह पैतृक भूमि ही उनके जीवनयापन का एकमात्र सहारा है. 
  
इस पूरे प्रकरण ने पलामू जिले में लगातार सामने आ रहे जमीन विवादों और अंचल कार्यालयों की संदिग्ध भूमिका को एक बार फिर उजागर कर दिया है. जिले में अक्सर ऐसे मामले देखने को सुनने को मिलते हैं जहां एक ही जमीन के दो अलग-अलग कागजात अंचल कार्यालय से जारी हो जाते हैं. यह बेहद गंभीर सवाल है कि आखिर एक ही भूमि पर दो पक्षों के पास समान दस्तावेज कैसे उपलब्ध हो जाते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि कहीं न कहीं जान-बूझकर सीधे-साधे और भोले-भाले ग्रामीणों को निशाना बनाया जाता है. ऐसे मामलों में पूरी जवाबदेही संबंधित अंचल कार्यालय की बनती है कि जिस पक्ष के दस्तावेज पूरी तरह वैध और सही हैं, उसके मामले का तुरंत निपटारा किया जाए ताकि किसी भी पीड़ित को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और भविष्य में भूमि विवाद के कारण किसी बड़ी अप्रिय घटना या हादसे को रोका जा सके.

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