न्यूज़11 भारत
सिल्ली/डेस्क: विकास की बड़ी-बड़ी योजनाओं के बीच सिल्ली प्रखंड की दो अहम सड़कें आज भी बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं. सिल्ली–रंगामाटी मार्ग से पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली बारेंदा–मरांगकिरी और जाड़ेया–श्यामनगर सड़कें वर्षों से जर्जर पड़ी हैं. गहरे गड्ढों, उखड़ी सड़क और जलजमाव के कारण इन मार्गों पर सफर करना किसी चुनौती से कम नहीं है. बरसात में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि राहगीरों का सुरक्षित घर लौटना भी मुश्किल हो जाता है.
यह मार्ग झारखंड से पश्चिम बंगाल के बाघमुंडी तक कम दूरी का महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है. इसी महत्व को देखते हुए पूर्व विधायक सुदेश कुमार महतो के प्रयास से करोड़ों रुपये की लागत से मरांगकिरी पुल का निर्माण कराया गया था. पुल वर्षों पहले बनकर तैयार हो गया, लेकिन आज तक उसका विधिवत उद्घाटन नहीं हो सका. मजबूरी में स्थानीय लोग बिना उद्घाटन के ही पुल का इस्तेमाल कर रहे हैं.
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस पुल से क्षेत्र के विकास और झारखंड-बंगाल संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद थी, वही पुल आज जर्जर सड़क के कारण अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर पा रहा है. सड़क की खराब हालत के कारण पुल का पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है.
सीमा क्षेत्र होने के कारण यह सड़क केवल स्थानीय आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच सामाजिक, आर्थिक और व्यावसायिक संपर्क की महत्वपूर्ण कड़ी भी है. बावजूद इसके वर्षों से इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है.
इसी मार्ग से जुड़ी जाड़ेया–श्यामनगर सड़क की स्थिति भी बेहद खराब है. यह सड़क आगे पश्चिम बंगाल तक जाती है तथा श्यामनगर के कई बालू घाटों का प्रमुख संपर्क मार्ग है. प्रतिदिन भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है. बरसात में कीचड़ और गहरे गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं आम हो गई हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क के एक हिस्से में निजी भूमि का विवाद भी निर्माण कार्य में बाधा बना हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग समन्वय बनाकर पहल करें तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है.
क्षेत्रवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने मरांगकिरी पुल को उसकी वास्तविक उपयोगिता तभी मिलेगी, जब बारेंदा–मरांगकिरी और जाड़ेया–श्यामनगर दोनों सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा. वर्तमान में सिल्ली के विधायक अमित कुमार महतो से लोगों को उम्मीद है कि वे इस बहुप्रतीक्षित मांग को प्राथमिकता देते हुए सड़क निर्माण और मरम्मत की दिशा में ठोस पहल करेंगे.
अब बड़ा सवाल यही है—क्या करोड़ों की लागत से बना पुल यूं ही बदहाल सड़कों के बीच अपनी उपयोगिता खोता रहेगा, या फिर क्षेत्र की वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान होगा? यह सवाल आज पूरे क्षेत्र की जनता प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पूछ रही है.