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रांची/डेस्क: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार द्वारा घोटालों की धीमी और रहस्यमयी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाया है. सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा है कि झारखंड का शराब घोटाला शायद देश के उन दुर्लभ मामलों में गिना जाएगा, जहां घोटाले की जांच करने वाली एजेंसी और उसके अधिकारी खुद जांच के घेरे में आएंगे. आखिर क्या वजह है कि पुख्ता सबूतों के बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ रहा?
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि ACB ने खुद अपनी जांच में सैकड़ों-हजारों करोड़ के घोटाले की पुष्टि की. मुख्यमंत्री के पूर्व सचिव की गिरफ्तारी हुई, बड़े अधिकारियों के बयान दर्ज हुए. लेकिन आज तक एक भी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई. यह देरी 'प्रक्रिया' है या 'प्रोटेक्शन' ? कहा जा रहा है कि उत्पाद विभाग से आधी रात को सबूत मिटा दिए गए. लेकिन घोटालेबाज शायद यह भूल गए कि हम डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक तकनीक के युग में जी रहे हैं. फाइलों को जलाया जा सकता है, पर डिजिटल ट्रेल को पूरी तरह मिटाना नामुमकिन है.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि ACB की इस रहस्यमयी सुस्ती पर भविष्य में उच्च स्तरीय जांच एजेंसियां और अदालतें भी सवाल पूछेंगी. चार्जशीट का रुकना कानून के साथ मजाक है. जांच का गला घोंटने की कोशिश करने वाले अधिकारी भी जवाबदेही से बच नहीं पाएंगे. बाबूलाल मरांडी ने आश्वस्त किया कि झारखंड की जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. न्याय की चक्की थोड़ी धीमी जरूर चल रही है, पर पीसती बहुत बारीक है. झारखंड के साथ न्याय होकर रहेगा. थोड़ा धैर्य रखिए, हिसाब सबका होगा!
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