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रांची/डेस्क: खिजरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेश कच्छप ने अपनी ही सरकार की प्रशासनिक नीतियों और कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. विधायक ने लगातार हो रहे आदिवासी अधिकारियों के तबादलों और थानों में थानेदारों की पोस्टिंग के तरीकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि राज्य में आदिवासियों के हितों की रक्षा के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहे हैं.
विधायक राजेश कच्छप द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. आदिवासी अफसरों की अनदेखी: राज्य में लगातार आदिवासी समुदाय के योग्य और ईमानदार अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाकर लूप लाइन में भेजा जा रहा है.
2.असंतुलित तबादला नीति: अधिकारियों के बार-बार हो रहे तबादलों से प्रशासनिक स्थिरता प्रभावित हो रही है, जिससे विकास कार्य ठप हैं.
3.थानेदारों की पोस्टिंग में धांधली: स्थानीय थानों में प्रभारियों की नियुक्ति में पारदर्शिता का घोर अभाव है. योग्य पुलिस अधिकारियों को दरकिनार किया जा रहा है.
4.जनता में बढ़ता असंतोष: गलत प्रशासनिक फैसलों और थानों के इस रवैये के कारण खिजरी सहित पूरे राज्य की जनता के बीच भारी नाराजगी है.
विधायक राजेश कच्छप ने मुख्यमंत्री से मामले को तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है. राजेश कच्छप ने कहा है कि यदि आदिवासी अधिकारियों के साथ न्याय नहीं हुआ और थानों की पोस्टिंग प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया, तो वे जनता की आवाज को सदन से लेकर सड़क तक और अधिक प्रखरता से उठाएंगे.
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