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रांची/डेस्क: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हाल ही में राज्य के नागर विमानन विभाग की नई बनकर तैयार इमारत के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे. इस दौरान उनके साथ मुख्य सचिव अविनाश कुमार भी मौजूद थे. निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने भवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और कुछ आवश्यक निर्देश भी दिए. अधिकारियों के अनुसार, इन निर्देशों के अनुपालन के बाद भवन का उद्घाटन कभी भी किया जा सकता है.
नागर विमानन विभाग, जिसे स्टेट हैंगर के नाम से भी जाना जाता है, में तैयार इस नई इमारत में विमान और हेलीकॉप्टर खड़े करने के लिए आधुनिक शेड का निर्माण किया गया है. साथ ही, यहां मुख्यमंत्री के लिए एक विशेष केबिन भी बनाया गया है, जहां से वे भविष्य में हेलीकॉप्टर के जरिए राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर सकेंगे.
चर्चा का विषय बनी तस्वीर
हालांकि, इस निरीक्षण से जुड़ी एक तस्वीर अब चर्चा का विषय बन गई है. मुख्यमंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई इस तस्वीर में नागर विमानन विभाग के निदेशक कैप्टन एसपी सिन्हा उनके ठीक पीछे खड़े नजर आ रहे हैं. तस्वीर में कैप्टन एसपी सिन्हा को जेब में हाथ डाले हुए देखा गया, जिसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं.
यह चर्चा है कि क्या किसी अधिकारी का इस तरह मुख्यमंत्री के साथ खड़ा होना "प्रोटोकॉल" के अनुरूप है. आमतौर पर वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे औपचारिक मुद्रा में हाथ सामने या पीछे रखकर राज्य के मुखिया के साथ उपस्थित हों. ऐसे में इस तस्वीर को कुछ लोग प्रोटोकॉल के उल्लंघन और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के रूप में देख रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि तस्वीर साझा होने के बाद भी इस पहलू पर तुरंत ध्यान नहीं गया. अब यह मुद्दा प्रशासनिक शिष्टाचार और जिम्मेदारी को लेकर बहस का विषय बन गया है.
सवाल है कि ये शख्स राज्य के मुखिया का कोई मित्र है या फिर अधिकारी ? हम साफ़ कर दें कि ये कोई मित्र नहीं बल्कि, राज्य सरकार के एक अधिकारी हैं. और अधिकारियों से इस तरह के आचरण की अपेक्षा नहीं की जाती है. क्योंकि किसी अधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष इन तरह की चीजों को "प्रोटोकॉल" के अनुरूप नहीं माना जा सकता है.