नीरज कुमार साहू/न्यूज़11 भारत
गुमला/डेस्क: पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना का महापर्व 'वट सावित्री व्रत' आज बसिया सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. सुबह की पहली किरण के साथ ही सुहागिन महिलाओं में पूजा-अर्चना को लेकर भारी उत्साह देखा गया. पारंपरिक परिधानों (लाल और पीले रंग की साड़ियों) में सजी-धजी महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर अपने-अपने क्षेत्रों के वट वृक्ष (बरगद के पेड़) के नीचे पहुंचकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी.
सुबह से ही गूंजे पौराणिक मंत्र और गीत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री के दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है. बसिया के विभिन्न चौक-चौराहों और मंदिरों के पास स्थित बरगद पेड़ों के नीचे सुबह से ही महिलाओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी. महिलाओं ने पेड़ की जड़ में जल, दूध, फूल, अक्षत और फल अर्पित किए. इसके बाद वट वृक्ष के चारों ओर सूत का धागा लपेटकर (फेरे लेकर) अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना की. इस दौरान पारंपरिक गीतों और मंत्रोच्चार से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा.
सावित्री और सत्यवान की कथा का श्रवण
पूजा के दौरान सुहागिनों ने सामूहिक रूप से बैठकर वट सावित्री की पौराणिक कथा सुनी. कथा में बताया गया कि किस तरह सती सावित्री ने अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा और बुद्धिमानी से यमराज के चंगुल से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ला दिए थे. तभी से यह माना जाता है कि जो भी सुहागिन महिला इस दिन सच्चे मन से वट वृक्ष और सावित्री-सत्यवान की पूजा करती है, उसके पति पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते है.
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