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रांची/डेस्क: हिरासत में यातना और मौत मामले में दायर अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने पलामू सीजेएम कोर्ट से मृतक युवक के खिलाफ केस का मूल रिकॉर्ड मांगा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात सामने आई कि युवक को रिमांड पर लेने के लिए पलामू सीजीएम कोर्ट में जो सर्टिफिकेट मेदिनीनगर अस्पताल द्वारा दिया गया था, उसमें शारीरिक फिट का कस्टडी लिखा हुआ था. जिसके आधार पर पुलिस ने रिमांड पर लिया था.
लेकिन सरकार के शपथ पत्र में 6 मार्च 2025 को युवक का एक अन्य फिटनेस से संबंधित कागजात है, जिसमें युवक का इंज्यूरी बताया गया है. लिहाजा कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए युवक के केस का मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.
सुनवाई में सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा. वहीं, प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शादाब ईकबाल ने पक्ष रखा. प्राथी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 1 मार्च 2025 को युवक महफूज अहमद को नवाबाजार से पुलिस पकड़ कर ले गई थी. उसके साथ हिरासत में मारपीट की गई थी. बाद में उसके खिलाफ पांकी थाना कांड संख्या 25/2025 दर्ज कर सीजेएम कोर्ट पलामू में पेश कर रिमांड पर लिया गया था. उस दौरान सीजेएम कोर्ट में पुलिस ने अस्पताल का एक सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत किया था, जिसमें युवक के घायल होने के बावजूद फिट फॉर कस्टडी बताया गया था.
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