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रांची/डेस्क: रांची विश्वविद्यालय के तहत संचालित इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज में सुविधाओं और स्टाफ को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई हैं. कोर्ट ने अगले सत्र से संस्थान में विद्यार्थियों के नामांकन पर रोक जारी रखी हैं. याचिका में कहा गया है कि संस्थान की लापरवाही के कारण 418 विद्यार्थियों का भविष्य संकट में हैं.
हाईकोर्ट ने संस्थान में प्रोफेसरों की नियमित नियुक्ति न होने पर सवाल उठाए. रांची विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि इंस्टिट्यूट में कोई भी स्वीकृत पद नहीं है और जो पद है, उन पर नियुक्ति जेपीएससी के माध्यम से की जाती हैं. याचिका में बताया गया कि बार कौंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत लाइब्रेरी, क्वालिफाइड प्रिंसिपल और कोर फैसिलिटी की कमी थी. बार कौंसिल ने अक्टूबर 2025 में मेल के माध्यम से संस्थान को 6 महीने के भीतर कमियों को दूर करने का निर्देश दिया था, लेकिन इंस्टिट्यूट ने यह नहीं किया. कोर्ट ने मामले की जांच और स्पष्टीकरण के लिए प्रधान सचिव उच्च शिक्षा, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, सचिव जेपीएससी, वीसी रांची यूनिवर्सिटी, डीन और डायरेक्टर इंस्टिट्यूट ऑफ़ लीगल स्टडीज को शुक्रवार को तलब किया हैं.
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