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हजारीबाग/डेस्क: हजारीबाग जिले में अवैध कोयले का कारोबार एक बार फिर बेलगाम होता नजर आ रहा है. बड़कागांव गोंदलपुरा के जोराकाट,सेहदा केरेडारी के कोले कंडाबेर, गिद्दी के लुरूँग्गा खपिया सहित कई क्षेत्रों में काले हीरे का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है. मॉनसून आने से पहले कोयला तस्करों ने बड़े पैमाने पर कोयले का भंडारण शुरू कर दिया है.
बताया जा रहा है कि बंद पड़ी खदानों और आसपास के क्षेत्रों से कोयला निकालकर विभिन्न स्थानों पर स्टॉक किया जा रहा है, ताकि बरसात के दिनों में भी आपूर्ति प्रभावित न हो. सूत्रों के अनुसार, कोयला माफिया जंगल और ग्रामीण मार्गों का इस्तेमाल कर तस्करी को अंजाम देते है. इन रास्तों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कोयला बिहार और उत्तर प्रदेश की मंडियों तक पहुंचाया जाता है. कई स्थानों पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग भी किया जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक, बंद खदान क्षेत्रों से कोयला निकालकर बाइक, साइकिल और छोटे वाहनों के जरिए डिपो तक पहुंचाया जा रहा है. वहां से ट्रकों के माध्यम से अन्य राज्यों में इसकी आपूर्ति की जा रही है. तस्करों ने कई इलाकों में अस्थायी भंडारण केंद्र भी बना लिए है, जहां बड़ी मात्रा में कोयला जमा किया जा रहा है. इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि अवैध कोयला कारोबार को कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है. उनका कहना है कि प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
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