घाघरा का प्यासा गुनिया गांव, सोता प्रशासन, पानी के लिए हाहाकार, बच्चे ढो रहे पान...

घाघरा का प्यासा गुनिया गांव, सोता प्रशासन, पानी के लिए हाहाकार, बच्चे ढो रहे पानी का बोझा, बूंद बूंद को तरस रहे ग्रामीण

नल-जल योजना फेल, सवाल उठ रहा कौन है जिम्मेदार?

घाघरा का प्यासा गुनिया गांव सोता प्रशासन पानी के लिए हाहाकार बच्चे ढो रहे पानी का बोझा बूंद बूंद को तरस रहे ग्रामीण

पंकज कुमार/न्यूज11  भारत

घाघरा/डेस्क:  राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हर घर नल से जल के दावों की जमीनी हकीकत घाघरा प्रखंड के कुहीपाठ पंचायत के गुनिया गांव में पूरी तरह बेनकाब हो गई है. यहां के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. थोड़ा गर्मी की दस्तक के साथ ही जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है, जिससे गांव में हाहाकार की स्थिति बन गई है.

एक किमी दूर से पानी लाने के लिए बच्चे और महिलाएं मजबूर

  • गांव में पानी का कोई स्थायी स्रोत नहीं है. ग्रामीणों को रोजाना एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर पानी लाना पड़ रहा है. सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि छोटे-छोटे बच्चे, जो पढ़ाई-लिखाई की उम्र में हैं, वे सिर पर भारी बर्तन ढोकर पानी लाने को मजबूर हैं.
  • नन्हे कंधों पर यह बोझ उनकी शिक्षा और सेहत दोनों पर भारी पड़ रहा है
  • प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाई परेशानी
  • ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार आवेदन देने और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
  • न तो खराब चापाकलों की मरम्मत हुई और न ही नए जल स्रोत की व्यवस्था की गई
  • यह स्थिति प्रशासन की उदासीनता और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

चुनावी वादे बनाम जमीनी सच्चाई

ग्रामीणों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा-  चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन आज जब हम पानी के लिए जूझ रहे हैं, तो कोई सुनने वाला नहीं है.
सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह विपरीत है

गाँव के लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
ग्रामीणों का कहना है कि अब चुप बैठना संभव नहीं, हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी.

कब जागेगा प्रशासन

  • गुनिया गांव की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन दावों की पोल खोलती है जो विकास के नाम पर किए जाते हैं.
  • अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है और इन प्यासे ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाता है.

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