घाघरा के किसानों का धान बिचौलियों के हाथों नीलाम, औने-पौने दाम पर लुटने को मजबूर किसान

घाघरा के किसानों का धान बिचौलियों के हाथों नीलाम, औने-पौने दाम पर लुटने को मजबूर किसान

घाघरा के किसानों का धान बिचौलियों के हाथों नीलाम औने-पौने दाम पर लुटने को मजबूर किसान

पंकज कुमार/न्यूज11  भारत

घाघरा/डेस्क: घाघरा प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक कृषि साख समिति (पैक्स/लैंप्स) की लचर व्यवस्था किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है. धान खरीद एवं भंडारण का कार्य लगभग ठप होने से स्थानीय किसान अपनी उपज को सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेचने में असमर्थ हैं. लैंप्स की सुविधाओं के अभाव और उदासीनता ने मेहनतकश किसानों को बिचौलियों के आगे औने-पौने दामों पर धान बेचने के लिए विवश कर दिया है.

सरकारी उदासीनता की भेंट चढ़ा धान खरीद अभियान, घाघरा के किसान बेहाल, बिचौलिये मालामाल

घाघरा प्रखंड के चपका, चुन्दरी, आदर सहित अन्य लैंप्स को धान की सरकारी खरीद की जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन अब तक न तो खरीद प्रक्रिया शुरू हुई है और न ही किसानों को कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश दिया गया है. पिछले सत्रों के बकाया भुगतान में भारी देरी और फाइलों की लेट–लतीफी से किसानों का लैंप्स और पैक्स पर भरोसा लगभग खत्म हो चुका है. प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS/LAMPS) में संसाधनों की कमी, भंडारण व्यवस्था का अभाव और बकायेदारी जैसी समस्याएं स्थानीय स्तर पर भी साफ नजर आ रही हैं.

धान कट चुका, लेकिन नहीं मिल रहा उचित दाम

धान कटाई के बाद किसानों को अगली फसल की तैयारी, खाद-बीज खरीदने, मजदूरी चुकाने और पारिवारिक खर्चों के लिए तत्काल नकदी की जरूरत पड़ती है. लैंप्स की निष्क्रियता और अनदेखी का फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं. ये लोग गांव-गांव घूमकर एमएसपी से काफी कम कीमत पर धान खरीद रहे हैं.

एक स्थानीय किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सरकारी रेट पर बेचने की उम्मीद लेकर कई बार लैंप्स गए, लेकिन न कोई सुनवाई हुई, न तौल शुरू हुई. घर में पैसे की किल्लत है, मजबूरी में हमको औने-पौने दाम पर ही धान बेचना पड़ रहा है.”

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल किसानों का आरोप है कि लैंप्स प्रबंधन और प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों से बार-बार शिकायत और गुहार के बाद भी कोई ठोस पहल नहीं की गई. न तो खरीद केंद्रों का संचालन नियमित हो पाया है और न ही बकाया भुगतान के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा तय की गई है.

किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद तंत्र की यह विफलता उन्हें सीधे आर्थिक घाटे की ओर धकेल रही है. यदि जल्द ही लैंप्स की व्यवस्था दुरुस्त कर धान अधिप्राप्ति शुरू नहीं की गई, तो किसानों का सरकारी तंत्र से पूरी तरह मोहभंग हो जाएगा और वे भविष्य में पंजीकरण एवं सरकारी योजनाओं से दूरी बना सकते हैं.

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि घाघरा प्रखंड क्षेत्र के सभी लैंप्स में तुरंत धान खरीद शुरू कराई जाए, बकाया भुगतान का निपटारा किया जाए और बिचौलियों की मनमानी रोकने के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए.

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