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रांची/डेस्क: झारखंड हाई कोर्ट से रांची के 'गौतम ग्रीन सिटी' में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है. हाई कोर्ट ने यहां के फ्लैटों और डुप्लेक्स (Duplex) की नीलामी करने के सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है. न्यायाधीश आनंदा सेन की एकल पीठ ने सुधीर कुमार मिश्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने इस पूरी गड़बड़ी के जिम्मेदार बिल्डर पवन सिंह और 'आवास एवं नगर विकास निगम' (HUDCO) को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है.
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला सीधे-सीधे सीधे-साधे घर खरीदारों के साथ हुई एक बड़ी धोखाधड़ी से जुड़ा है. 'गौतम ग्रीन सिटी' के मालिक और बिल्डर पवन कुमार सिंह ने इस पूरी जमीन पर प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए हुडको (HUDCO) नाम की सरकारी संस्था से एक बड़ा लोन (कर्ज) लिया था. नियम के मुताबिक, लोन लेने के लिए उन्होंने यह जमीन हुडको के पास गिरवी रख दी थी. लेकिन जब उन्होंने लोगों को फ्लैट और डुप्लेक्स बेचे, तो खरीदारों से यह बात पूरी तरह छुपा ली कि जमीन पर पहले से ही बैंक का कर्ज है.
बिल्डर बना डिफॉल्टर
घर बेचने के बाद बिल्डर ने लोगों से तो पूरा पैसा ले लिया, लेकिन हुडको को लोन की किस्तें समय पर वापस नहीं कीं. किस्तें न मिलने के कारण सरकारी नीलाम पदाधिकारी ने बिल्डर को कानूनी रूप से 'डिफॉल्टर' (कर्ज न चुकाने वाला) घोषित कर दिया.
कोर्ट में भी दिया धोखा
जब हुडको ने अपना पैसा वसूलने के लिए 'ऋण वसूली न्यायाधिकरण' (DRT कोर्ट) का दरवाजा खटखटाया, तो बिल्डर ने वहां एक प्रस्ताव रखा. बिल्डर ने कहा कि उसे इस सोसाइटी के 5 फ्लैट और 1 डुप्लेक्स बेचने की अनुमति दी जाए, और उनसे जो पैसा मिलेगा, उसे वह सीधे हुडको के खाते में जमा करा देगा.
पैसे डकार गया बिल्डर
इस वादे के बाद, सुधीर कुमार मिश्र नाम के व्यक्ति ने पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए, रजिस्ट्री और सेल डीड कराके एक डुप्लेक्स खरीदा और अपनी मेहनत की पूरी गाढ़ी कमाई बिल्डर को दे दी. लेकिन बिल्डर की नीयत बदल गई, उसने वह पैसा हुडको में जमा करने के बजाय खुद के पास रख लिया और खरीदारों को पूरी तरह धोखे में रखा.
जब आशियाने पर मंडराया संकट, तो पहुंचे हाई कोर्ट
चूंकि हुडको को उसका पैसा नहीं मिला था, इसलिए लोन रिकवरी कोर्ट (DRT) ने कड़ा कदम उठाते हुए पिछले महीने 7 जुलाई को उन निर्दोष खरीदारों को नोटिस जारी कर दिया, जिन्होंने बिल्डर से घर खरीदे थे. नोटिस में कहा गया था कि उनके घरों को सील करके नीलाम कर दिया जाएगा ताकि बैंक के कर्ज की वसूली हो सके. इसके खिलाफ पीड़ित खरीदार सुधीर मिश्र ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की. उन्होंने कोर्ट को बताया कि जब उन्होंने अपने हिस्से का पूरा पैसा ईमानदारी से बिल्डर को दे दिया है, तो बिल्डर की धोखाधड़ी की सजा उन्हें और उनके परिवार को क्यों मिले? हाई कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह सही माना. कोर्ट ने साफ कहा कि आम लोगों को इस तरह परेशान नहीं किया जा सकता और तुरंत जिला नीलाम पदाधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी.
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