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रांची/डेस्क: झारखंड की पूर्व शराब नीति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. यह मामला Vision Hospitality से जुड़ा है, जिसे पूर्व शराब नीति के तहत झारखंड स्टेट बेवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JSBCL) द्वारा मैनपावर एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया था.
मामले में JSBCL ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने करीब 20 करोड़ रुपये की राशि कम जमा की है. इस आरोप के आधार पर JSBCL ने पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट (PDR Act) के तहत उक्त राशि की वसूली के लिए सर्टिफिकेट केस दायर किया और नोटिस जारी किया.
इस नोटिस को Vision Hospitality की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में कहा गया कि PDR Act और एक्साइज एक्ट के तहत वसूली के लिए नोटिस जारी करने का अधिकार राज्य सरकार को है, न कि JSBCL को. साथ ही यह भी दलील दी गई कि दोनों पक्षों के बीच हुए एग्रीमेंट के अनुसार किसी भी विवाद का समाधान आर्बिट्रेशन के माध्यम से होना चाहिए.
इससे पूर्व हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने JSBCL की डिमांड पर अंतरिम रोक (stay) लगा दी थी और यह सवाल उठाया था कि क्या JSBCL और राज्य सरकार एक ही इकाई हैं या अलग-अलग.
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान JSBCL की ओर से जवाब दाखिल किया गया, लेकिन कोर्ट उसके जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा. इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से भी कई अहम सवाल पूछे. कोर्ट ने जानना चाहा कि जब JSBCL राज्य सरकार नहीं है तो जेएसपीसीएल के रिक्विजिशन पर बिना एजुदीकेशन और बिना सर्टिफिकेट ऑफिसर के सेटिस्फेक्शन के डायरेक्टली नोटिस कैसे जारी कर दिया गया. कोर्ट ने इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब देने के लिए राज्य सरकार के वकील को अगली तारीख पर पूरी तैयारी के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है.
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता चंचल जैन ने रखा पक्ष. मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है. तब तक पूर्व में दिया गया स्टे आदेश बरकरार रहेगा.