राहुल कुमार/न्यूज11भारत
चंदवा/डेस्क: धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 125वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को चंदवा में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया. इस अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा स्मारक समिति, गुरीटांड के तत्वावधान में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई.कार्यक्रम की शुरुआत समिति के सितमोहन मुंडा, पड़हा राजा धनेश्वर उरांव, कर्मा मुंडा सहित अन्य लोगों द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई. इसके बाद उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा उनकी स्मृति में प्रार्थना की. सभा को संबोधित करते हुए सितमोहन मुंडा ने भगवान बिरसा मुंडा के गौरवशाली इतिहास और उनके संघर्षों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन और उनके द्वारा नियुक्त जमींदार आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन सहित प्राकृतिक संसाधनों से बेदखल कर रहे थे. इसके खिलाफ भगवान बिरसा मुंडा ने वर्ष 1895 में जमींदारी प्रथा और ब्रिटिश राजस्व व्यवस्था के विरोध में आंदोलन का बिगुल फूंका.
उन्होंने कहा कि मात्र 25 वर्ष की आयु में मातृभूमि की रक्षा और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए बिरसा मुंडा शहीद हो गए. उनके अदम्य साहस, संघर्ष और बलिदान के कारण आज पूरा देश उन्हें श्रद्धापूर्वक ‘धरती आबा’ के रूप में स्मरण करता है. उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन युवाओं और समाज के लिए प्रेरणास्रोत है तथा हमें उनके आदर्शों और विचारों से सीख लेने की आवश्यकता है. कार्यक्रम में प्रमोद साहू, बबन मुंडा, चरकु पाहन, रथू मुंडा, आशुतोष मुंडा, धनेश्वर तुरी, मो. अलाउद्दीन पप्पू समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग एवं ग्रामीण उपस्थित थे.
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