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बोकारो/डेस्क: 12 मार्च अपने जन्मदिन के अवसर पर उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा ने सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर एक अत्यंत भावनात्मक कविता साझा की. इस कविता के माध्यम से उन्होंने अपने बाबूजी की स्मृतियों को याद करते हुए मन की गहरी संवेदनाओं को शब्दों में व्यक्त किया है.
कविता में उन्होंने लिखा है कि लोग कहते है कि जीवन कभी रुकता नहीं और हर परिस्थिति में जीना ही पड़ता है, लेकिन कभी-कभी मन किसी स्मृति में ठहर जाता है. बहते समय और भागती दुनिया के बीच मन एक ऐसे द्वीप की तरह हो जाता है, जो स्थिर और जड़ प्रतीत होता है, जिसे केवल मन ही महसूस कर सकता है. अपने जन्मदिन के दिन साझा की गई इस कविता में उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि शुभकामनाओं के बीच भी मन निर्विकार और उमंगहीन हो सकता है, जब स्मृतियां गहराई से मन को छूती है. उल्लेखनीय है कि उपायुक्त की इस भावनात्मक पोस्ट को सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा काफी सराहा जा रहा है. कई लोगों ने इसे संवेदनशील, हृदयस्पर्शी और जीवन के गहरे भावों को व्यक्त करने वाली रचना बताया है.

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