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पलामू/डेस्क: पलामू जिले के छतरपुर अनुमंडलीय अस्पताल की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है. शनिवार को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक नाबालिग को बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने के बाद समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने का मामला सामने आया है. दर्द से कराहते घायल और उसकी एम्बुलेंस के लिए अस्पताल परिसर में गुहार लगाते परिजनों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल दी है.
घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि दुर्घटना के बाद घायल नाबालिग को तत्काल उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजने की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल में एम्बुलेंस न मिलने के कारण उसे भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. परिजनों का गंभीर आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद समय पर वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे मजबूरन उन्हें निजी वाहन की व्यवस्था कर घायल को मेदिनीनगर ले जाना पड़ा. इस घटना ने साफ कर दिया है कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जान बचाने के दावे कागजी साबित हो रहे हैं.
मामले के तूल पकड़ने पर छतरपुर अनुमंडलीय अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. राजेश अग्रवाल ने सफाई देते हुए कहा है कि पूर्व में एम्बुलेंस ने एक मरीज को अस्पताल पहुंचाया था जिसके बाद वह अचानक ब्रेकडाउन हो गई. वर्तमान स्थिति यह है कि पूरे अनुमंडल अस्पताल में अब केवल एक एम्बुलेंस और एक ही ड्राइवर बचा है, जिसके भरोसे पूरी चिकित्सा व्यवस्था चल रही है. हालांकि, अस्पताल प्रशासन की ओर से उच्च अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराने की बात कही जा रही है, लेकिन एक एम्बुलेंस के सहारे चल रहे अस्पताल की यह व्यवस्था किसी बड़े खतरे को खुला निमंत्रण दे रही है.
राज्य के वित्त मंत्री सह स्थानीय विधायक राधाकृष्ण किशोर द्वारा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के तमाम दावों के बीच इस प्रकार की घटनाएं व्यवस्था की जमीनी हकीकत को बयां करती हैं. स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते आपातकालीन सेवाओं को दुरुस्त नहीं किया गया, तो छोटी सी देरी भी किसी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है. फिलहाल, इस गंभीर मामले पर अस्पताल प्रबंधन का कोई ठोस आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है, जिससे आम जनता और क्षेत्रीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे प्रशासन से इस लचर व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं.
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