आईआईटी -आईएसएम धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह का शुभारंभ कल

गौरव गाथा

आईआईटी -आईएसएम धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह का शुभारंभ कल

एक सदी की गौरवगाथा और ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प का संगम

आईआईटी -आईएसएम धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह का शुभारंभ कल

अम्बर कलश तिवारी/न्यूज11  भारत

धनबाद/डेस्क:  आईआईटी (आईएसएम) धनबाद अपनी 100 वर्षीया ज्ञान-यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँच गया है. 3 दिसंबर से प्रारंभ होने वाला शताब्दी स्थापना सप्ताह न केवल संस्थान की ऐतिहासिक उपलब्धियों का भव्य उत्सव है, बल्कि भारत के वैज्ञानिक, तकनीकी और राष्ट्रीय विकास के आगामी दौर की दिशा भी निर्धारित करेगा. वर्ष 1926 में रॉयल स्कूल ऑफ माइन्स, लंदन की तर्ज पर स्थापित इस संस्थान ने भारतीय खनन एवं भू-विज्ञान शिक्षा को एक नई ऊँचाई दी और समय के साथ यह आधुनिक इंजीनियरिंग, ऊर्जा विज्ञान, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा, सतत विकास, क्रिटिकल मिनरल्स, रोबोटिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजीज का अग्रणी केंद्र बन चुका है.

शताब्दी वर्ष के इस उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे. राष्ट्रीय नीति-निर्माण, सुशासन तथा तकनीकी परिवर्तन के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनकी भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है, और उनका आगमन इस ऐतिहासिक अवसर के महत्व को और अधिक रेखांकित करता है. उद्घाटन के अवसर पर कई विशिष्ट वक्ता, वैज्ञानिक, वरिष्ठ प्रशासक, उद्योग-जगत के नेता और भू-विज्ञान एवं ऊर्जा क्षेत्रों के दिग्गज भी उपस्थित रहेंगे, जिनके चित्र संस्थान के आधिकारिक बैनर में प्रदर्शित हैं 

पहले दिन का कार्यक्रम संस्थान की परंपरा और आधुनिक भारत की तकनीकी आकांक्षाओं, दोनों को जोड़ते हुए तैयार किया गया है. सुबह शताब्दी वृक्षारोपण से कार्यक्रम की शुरुआत होगी, जो संस्थान की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और ‘ग्रीन कैंपस’ की दिशा में उसके संकल्प का प्रतीक है. इसी समय शताब्दी रक्तदान शिविर भी आयोजित होगा, जो सामाजिक उत्तरदायित्व की संस्थान की दीर्घ परंपरा को आगे बढ़ाता है.

पूर्वाह्न 10 बजे पेनमैन ऑडिटोरियम में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ औपचारिक उद्घाटन होगा. इसके बाद होगा पहला प्रमुख विचार-विमर्श सत्र—“अमृत काल विमर्श: विकसित भारत @2047”—जो आने वाले सप्ताह के बौद्धिक वातावरण को परिभाषित करेगा. यह विमर्श इस बात पर केंद्रित होगा कि राष्ट्र की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारत को विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आत्मनिर्भरता के आधार पर किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, और इस परिवर्तन में आईआईटी (आईएसएम) जैसे संस्थानों की क्या भूमिका होनी चाहिए.

दिन का सबसे आकर्षक और नवाचार-प्रधान चरण होगा ज्ञान-विज्ञान प्रांगण (Gyan Vigyan Prangan) का उद्घाटन—एक विस्तृत विज्ञान एवं तकनीक प्रदर्शनी, जिसमें 3D मेटावर्स आधारित माइनिंग एप्लिकेशन, सेस्मोलॉजी के उन्नत मॉडल, डिजिटल ट्विन, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समर्थित औद्योगिक समाधान, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकें, और भविष्य की इंजीनियरिंग प्रयोगशालाओं की प्रभावशाली झलक देखने को मिलेगी. यह प्रांगण आईआईटी (आईएसएम) की उस उल्लेखनीय यात्रा का जीवंत प्रमाण है, जिसमें उसने खनन शिक्षा के अपने ऐतिहासिक मूल को संरक्षित रखते हुए आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका अपनाई है.

दोपहर के सत्र में अमृत काल विमर्श—टेक्नोलॉजी एवं स्किल इनिशिएटिव्स फॉर विकसित भारत @2047 विषयक व्यापक प्लेनरी लेक्चर आयोजित होंगे. इनमें भारत की तकनीकी क्षमता, कौशल-उन्नयन, नवाचार पारितंत्र, भविष्य के उद्योगों और रणनीतिक क्षेत्रों में आईआईटी की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए जाएंगे.

सांयकाल परिसर सांस्कृतिक रंग में रंग जाएगा, जब कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक संध्या, शंभू शिखर एवं समूह की प्रस्तुति के साथ, शताब्दी उत्सव के प्रथम दिन को एक सजीव, हृदय-स्पर्शी अनुभव प्रदान करेगी. यह आयोजन IIT (ISM) की उस परंपरा को प्रतिबिंबित करता है जिसमें विज्ञान और तकनीक के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक भावनाओं का समन्वय हमेशा से रहा है.

शताब्दी सप्ताह के आगामी दिनों में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, छात्रों के नवाचार प्रदर्शन, तकनीकी प्रदर्शनी, विरासत यात्रा, विद्यालयों के लिए विशेष कार्यक्रम, पूर्व छात्रों का महा-सम्मेलन तथा 9 दिसंबर के भव्य शताब्दी स्थापना दिवस समारोह सहित अनेक कार्यक्रम आयोजित होंगे. सप्ताह का समापन एक अभूतपूर्व ड्रोन शो के साथ होगा, जो संस्थान के अगले सौ वर्षों की उड़ान का रूपक प्रस्तुत करेगा.

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद इस ऐतिहासिक सप्ताह की दहलीज़ पर एक नई ऊर्जा के साथ खड़ा है—अपनी समृद्ध विरासत को सम्मान देते हुए और भविष्य की वैश्विक वैज्ञानिक एवं तकनीकी चुनौतियों को स्वीकार करने के संकल्प के साथ. विज्ञान, नवाचार, अनुसंधान और राष्ट्र-निर्माण के सौ वर्ष पूरे कर चुके इस संस्थान का अगला सौ वर्ष और अधिक सृजनशील, अधिक सशक्त और अधिक राष्ट्रीय महत्व का होने जा रहा है. संस्थान सभी विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों, शोधकर्ताओं, उद्योग साझेदारों, नीति-निर्माताओं और शुभचिंतकों को इस ऐतिहासिक उत्सव में शामिल होने के लिए हार्दिक आमंत्रण देता है.

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