चांडिल डैम में ‘भगवान भरोसे’ बोटिंग, फटे लाइफ जैकेट और सुरक्षा इंतजाम नदारद, सैल...

चांडिल डैम में ‘भगवान भरोसे’ बोटिंग, फटे लाइफ जैकेट और सुरक्षा इंतजाम नदारद, सैलानियों की जान जोखिम में

चांडिल डैम में ‘भगवान भरोसे’ बोटिंग फटे लाइफ जैकेट और सुरक्षा इंतजाम नदारद सैलानियों की जान जोखिम में

मनोज सिंह/न्यूज़11 भारत
सरायकेला/डेस्क:
मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे के बाद देशभर में पर्यटक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है. वहीं सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल डैम में अब भी सैलानियों की जान जोखिम में डालकर नौका विहार कराया जा रहा है. 

आपको बता दें कि, पर्यटकों को बोटिंग पर जाने से महज कुछ सेकंड पहले ही लाइफ जैकेट थमा दिया जाता है. कई जैकेट फटे हुए है, उनकी सिलाई खुली हुई है और वे साधारण थर्मोकोल से बने है. इतना ही नहीं, कई जैकेट के बेल्ट भी टूटे हुए है. ऐसे में चांडिल डैम में नौका विहार कर रहे सैलानी मानो ‘भगवान भरोसे’ ही सफर कर रहे है. अगर कोई हादसा हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? हालांकि नौका विहार संचालक का कहना है कि वे पिछले 20 वर्षों से यह सेवा दे रहे हैं और अब तक कोई घटना नहीं हुई है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है? वैसे विशेषज्ञों के अनुसार, थर्मोकोल भरे साधारण जैकेट सुरक्षित नहीं माने जाते। गहरे पानी के लिए टाइप-2 या टाइप-3 पीएफडी अधिक सुरक्षित होते हैं, जिनमें बेहतर फ्लोटेशन सपोर्ट होता है और डूबने से बचाव संभव होता है जबकि यहां इस्तेमाल हो रहे जैकेट इस मानक पर खरे नहीं उतरते. विशेषज्ञ यह भी बताते है कि फोम वाले जैकेट की उछाल क्षमता (बॉयेंसी) सीमित होती है. यदि जैकेट फटा हुआ हो, तो उसमें पानी घुसने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे व्यक्ति के डूबने की आशंका और बढ़ जाती है. चांडिल डैम में ऐसी खामियां साफ देखी जा सकती है.

इतना ही नहीं, नावों में फायर सेफ्टी उपकरण भी नहीं है. अगर किसी नाव के इंजन में आग लग जाए, तो उसे बुझाने के लिए कोई इंतजाम नहीं है. इन तमाम खामियों के बावजूद नौका विहार धड़ल्ले से जारी है. गौरतलब है कि चांडिल डैम में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों से पर्यटक घूमने आते है. हालांकि समिति का कहना है कि तूफान के दौरान नौका विहार बंद कर दिया जाता है और 5 साल से कम उम्र के बच्चों को बोटिंग की अनुमति नहीं है, जो सुरक्षा के लिहाज से सही कदम है. हालात यह है कि लोग 185 फीट गहरे पानी में अपनी जान जोखिम में डालकर नौका विहार कर रहे है. प्रशासन और सरकार को चाहिए कि जबलपुर की घटना से सबक लेते हुए चांडिल डैम में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करें, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके.

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