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रांची/डेस्क: 2 अक्तूबर के अवसर पर कलकत्ता पब्लिक स्कूल, ओरमांझी रांची में धूमधाम से राष्ट्रीय पर्व आयोजित की गई. उक्त अवसर पर विद्यालय समूह के अध्यक्ष प्रभाष कुमार झा ने उपस्थित शिक्षकों एवं छात्रों को 2 अक्तूबर की प्रासंगिकता बताते हुए महात्मा गाँधी एवं शास्त्राी जी के जीवन की अनेकानेक समानताओं का उल्लेख करते हुए उनके प्रति शब्दांजलि के माध्यम से श्रद्धा सुमन समर्पित किया. सत्य एवं अहिंसा के प्रति आग्रह का विस्तारपूर्वक वर्णन कर झूठ न बोलने, गलत कार्य की प्रवृत्ति का त्याग के लिए प्रेरित किया. गाँधी जी का दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है और सम्पूर्ण विश्वभर में ग्राह्रय है.
विद्यालय की प्राचार्या प्रियम्दा झा ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि महात्मा गाँधी एवं शास्त्री जी के जीवन से हमे अपने लौकिक, सांसारिक जीवन में अनेकानेक व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है. उन्होंने बताया कि सामान्य नागरिक की तरह ही गाँधीजी ने भी बचपन में गलत कार्य किए थे, परन्तु अपने कृत्य का आकलन कर अपने पिता से सब कुछ सही-सही बताकर प्रण लिया कि संपूर्ण जीवन में अनैतिक कार्य से दूर रहूँगा. महात्मा गाँधी जी एवं शास्त्री जी के आदर्श अनुकरणीय हैं, जिसे हरेक नागरिक को अपनाना चाहिए.
विद्यालय के निदेशक, मिथिलेश कुमार मिश्र ने राष्ट्रीय पर्व की महत्ता बताते हुए गाँधी जी को सम्पूर्ण विश्व के नागरिक के रूप में प्रतिष्ठापित किया. दक्षिण अफ्रीका के प्रवास के दौरान रंगभेद के खिलाफ संघर्षरत रहे. 1915 में भारत आगमन के उपरांत1917 में प्रथम बार चम्पारण सत्याग्रह के नायक के रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़े और पहली बार अंग्रेजी नीति की हार हुई. नील की खेती की तीन कठिया प्रणाली समाप्त हुई और उसके बाद वे पहली बार महात्मा कहलाए. उसके बाद असहयोग आन्दोलन, दाण्डीमार्च, सविनय अवज्ञा आन्दोलन, भारत छोड़ो आन्दोलन आदि का नेतृत्व गाँधीजी ने किया. गोलमेज सम्मेलन में कैसे उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को निरूतर कर दिया इसका भी वर्णन किया. उसी प्रकार शास्त्री जी- जिन्ना संवाद का भी वर्णन किया गया.
उक्त अवसर पर छात्रों ने विभिन्न प्रकार के राष्ट्र भक्ति थीम पर नृत्य प्रस्तुत किए . साथ ही दक्षिण अफ्रीका की दास्तान का मूकाभिनय भी अत्यन्त ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया.