राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत रूग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता रोकथा...

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत रूग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता रोकथाम पर कार्यशाला आयोजित

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत रूग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता रोकथाम पर कार्यशाला आयोजित

शुभेंदु गुप्ता/ न्यूज 11 भारत
देवघर/डेस्क: 
देवघर के शहरी एवं ग्रामीण वासियों को फाइलेरिया से होने वाले विकलांगता को रोकने हेतु एमएमडीपी किट का निःशुल्क वितरण और इसके उपयोग करने के प्रति जागरूक करने पर बल देने हेतु कुल 50 जिला एवं प्रखंड स्तरीय पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया गया.

सिविल सर्जन डॉ जूगल किशोर चौधरी के निर्देशानुसार आज दिनांक 08.12.2025 को प्रातः 10:30 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक स्थानीय आईएमए हाॅल, पूराना सदर अस्पताल परिसर सभागार में फाइलेरिया एलिमिनेशन के तहत जिला स्तरीय एक दिवसीय मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एवं डिसएबिलिटी प्रीवेंशन (एमएमडीपी) पर प्रशिक्षण सह प्रशिक्षक (टी.ओ.टी.) कार्यशाला का आयोजन जिला भीबीडी पदाधिकारी डॉ अभय कुमार यादव की अध्यक्षता में आयोजित किया गया. जिसमें प्रशिक्षक इनके अतिरिक्त जिला भीबीडी सलाहकार- डाॅ गणेश कुमार यादव एवं एम्स देवघर के सहायक आचार्या, सीएफएम की डॉ आभा कुमारी के साथ प्रतिभागियों में देवघर जिला के सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल एवं सभी प्रखंडों से एमटीएस, एस.आई., एस.डब्लू., एएनएम, एमपीडब्ल्यू एवं सहिया साथी आदि को मिलाकर कुल 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया.  इस कार्यशाला में पिरामल स्वास्थ्य, डेवलपमेंट पार्टनर के पीओसीडी ने भी अपेक्षित सहयोग दिया. 

जिला  शहरी एवं सभी प्रखंड स्तरीय पर्यवेक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों को फाइलेरिया से बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए इसके रुग्णता प्रबंधन करने के विधि को विस्तृत रूप से पीपीटी के माध्यम से बताया गया. साथ ही इसमें चार फाइलेरिया रोगियों को भी आमंत्रित किया गया, जिनको मोबिलिटी मैनेजमेंट करके प्रायोगिक तौर पर सभी को इसकी बारीकियों को बताया गया तथा इसके इलाज के बारे में पूरी जानकारी दी गई है. 

लिंफोडिमा फाइलेरियासिस को पहचानने तथा इसके सात स्टेज के बारे में सबको पहचान करने के साथ इनका इलाज एवं रूग्णता प्रबंधन व विकलांगता रोकथाम करने के बारे में जानकारी दिया गया.सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि फाइलेरिया रोगी आज भी ऐसी परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं जिनके लिए हमें लगातार काम करते रहना होगा सिर्फ संगठनात्मक स्तर पर ही नहीं बल्कि निजी तौर पर भी एक जागरूकता पैदा करनी होगी, ताकि समाज खुद भी इस बीमारी के प्रति सजग और संवेदनशील बन सके और ऐसे हालात ही ना बनने दें कि हमारे देश के भविष्य- छोटे बच्चे भी इससे प्रभावित हो. फाइलेरिया रोग हम सभी के लिए एक चिंता का विषय है क्योंकि इससे होने वाली अपंगता दुनिया में दूसरा स्थान रखता है जो कि देश की इकनॉमिक कंडीशन को भी प्रभावित करता है. इससे उत्पन्न सामाजिक स्टीग्मा हमारे लिए बहुत ही खराब है, जिसे खत्म करना हम सभी का उत्तरदायित्व है : जिसमें मीडिया बंधुओं को भी इसमें आगे आना चाहिए. ताकि इससे संबंधित जागरूकता उत्पन्न हो और समाज के लोग इसके लिए सजग होकर अपने घर तथा आसपास कहीं पानी जमा न होने दें और मच्छरों को पनपने नहीं दें. जिनको फाइलेरिया हो जाता है उनके अपने प्रभावित अंग का देखभाल और रखरखाव करने संबंधी जो भी जानकारी दी गई है उसको अमल करने के लिए सतत निगरानी की भी आवश्यकता है तथा ऐसे रोगी को 15 दिनों में या महीने में 1 दिन अस्पताल आकर के अपने स्थिति के बारे में बताते हुए चिकित्सक से परामर्श के अनुसार इलाज कराएं.

जिला भीबीडी पदाधिकारी डॉ अभय कुमार यादव द्वारा बताया गया कि देवघर जिला के सभी सरकारी अस्पतालों एवं सीएचसी के अस्पतालों में प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को निशुल्क फाइलेरिया क्लिनिक एवं एमएमडीपी क्लिनिक संचालित है. जहां पर फाइलेरिया के  लिम्फोएडिमा रोगियों, हाइड्रोसील रोगियों को मुफ्त सलाह एवं उनका उपचार किया जाता है.  इसके अलावा बताया गया कि जिन फाइलेरिया रोगियों को जब भी एक्यूट अटैक्स (एडीएल) - बुखार, दर्द, लालिमा के साथ त्वचा में जलन, इंट्री लिजन, ज़ख्म के साथ फंगल या बैक्टीरियल संक्रमण आदि हो जाए, तो उन्हें तुरंत चिकित्सक से परामर्श के अनुसार पूर्ण इलाज लेना चाहिए अन्यथा एक्यूट अटैक के बाद संक्रमण से रोग एक स्टेज आगे बढ़ जाता है. 

*अंत में मोर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रीवेंशन के लिए चारों उपस्थित फाइलेरिया मरीजों को एमएमडीपी किट उपलब्ध कराते हुए उनको वीडियो के माध्यम से इसकी देखभाल करने तथा व्यायाम करने के बारे में विस्तार से जिला भीबीडी सलाहकार डॉ गणेश कुमार यादव एवं एम्स की डॉ आभा कुमारी द्वारा जानकारी दिया गया और बताया गया कि फाइलेरिया बीमारी ठहरे हुए गंदे पानी में पनपने वाली क्यूलेक्स क्यूनक्यूफेसिएटस नामक संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से फैलती है. जिसके  काटने से सभी को बचने का उपाय करना चाहिए. 

लक्षण:- फाइलेरिया बिमारी एक तरह के धागेनुमा वर्म : वाउचेरेरिया बैंक्रॉफ्टी नामक परजीवी के कारण होता है. लिम्फोएडिमा या हाथीपांव के लक्षण आने में 5 से 25 वर्ष तक का समय लग जाता है. शुरुआत में लिम्फोएडिमा लक्षण-रहित रहते हैं, जिसमें अचानक बिना किसी अन्य कारण से लिंफ नोड में सूजन (जांघों या कांख में गिल्टी होना), दर्द और बुखार आदि आने पर फाइलेरिया का संक्रमण होने की संभावना के तहत जांच व पहचान हेतु चिकित्सक से संपर्क करके इलाज कराने पर इसे बढ़ने से रोका जा सकता है. इसके लिए सबको जागरूक करना आवश्यक है. साथ ही सभी जन-मानस (सभी स्वस्थ एवं सभी फाइलेरिया ग्रसीत) को साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा डीईसी एवं अल्बेंडाजॉल का सेवन करने से इस बिमारी पर बहुत हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है. जिसे अपने क्षेत्रों में अन्य छुटे हुए को प्रशिक्षित कर फाइलेरिया नियंत्रण में सहयोग लेने हेतु बताया गया.

इस दौरान जिला भीबीडी पदाधिकारी डॉ अभय कुमार यादव, जिला भीबीडी सलाहकार डॉ गणेश कुमार यादव, एम्स की सहायक प्रोफेसर डॉ आभा कुमारी, एफएलए श्री रवि सिन्हा, डीईओ श्री कांग्रेस मंडल, पिरामल स्वास्थ्य के श्री पिंटू तिवारी, रीता सिंह सहित एनयूएचएम, नगर निगम एवं सभी सीएचसी से एमटीएस, एस.आई., एस.डब्लू., एएनएम, एमपीडब्ल्यू एवं सहिया साथी आदि उपस्थित रहे.

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