नीरज कुमार साहू/न्यूज11 भारत
बसिया/डेस्क: प्रखंड के घनी आबादी वाले कुम्हारी गांव में इस भीषण गर्मी के बीच पेयजल का गहरा संकट खड़ा हो गया है. सरकारी उदासीनता का आलम यह है कि गांव में करोड़ों की लागत से बना जल मीनार पिछले कई वर्षों से महज एक शोपीस (सफेद हाथी) बनकर रह गया है, जबकि ग्रामीण पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं.
मशीन में खराबी और प्रशासन की बेरुखी
कुम्हारी पंचायत के मुखिया वीर बंसी पाल बड़ाइक ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि गांव में पिछले लगभग 4 से 5 वर्षों से पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद है. उन्होंने कहा कि जलापूर्ति करने वाली मशीन में बार-बार तकनीकी खराबी आती है, जिसे ठीक करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई. मुखिया के अनुसार, इस समस्या के समाधान के लिए पूर्व में गुमला उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई गई थी, लेकिन नतीजा आज भी सिफर है.
ग्रामीणों में आक्रोश, जल्द समाधान की मांग
चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के बीच पानी की सप्लाई बंद होने से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने जनता की सुविधा के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर जल मीनार तो खड़ा कर दिया, लेकिन देख-रेख के अभाव में यह योजना दम तोड़ रही है.
क्या है मुख्य मांग
कुम्हारी पंचायत के मुखिया और ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन, जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार से पुरजोर माँग की है कि जल मीनार की खराब पड़ी मशीनों को तत्काल युद्धस्तर पर ठीक कराया जाए.
गांव में नियमित जलापूर्ति बहाल की जाए ताकि ग्रामीणों को इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके.
अब देखना यह है कि प्रशासन कुम्हारी गांव की इस प्यास को बुझाने के लिए कब जागता है या ग्रामीणों को इसी तरह जल संकट झेलना पड़ेगा.
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