सांसद विद्युत वरण महतो

5 संसद रत्न का रिकॉर्ड: जानिए जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो की हार से हैट्रिक तक की पूरी कहानी 

इस सम्मान के साथ ही सांसद विद्युत् वरण महतो सबसे अधिक बार संसद रत्न पुरस्कार से सम्मानित होने वाले सांसद बन गए हैं.

By : Dipali Kumari

5 संसद रत्न का रिकॉर्ड: जानिए जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो की हार से हैट्रिक तक की पूरी कहानी 

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
 संसद रत्न पुरस्कार 2026 का 16वां समारोह 9 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के भीम हॉल में आयोजित किया गया. इस बार कुल 12 सांसदों और 4 संसदीय स्थायी समितियों को सम्मानित किया गया. इनमें झारखंड से गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे और जमशेदपुर सांसद विद्युत् वरण महतो का नाम भी शामिल है. 
सांसद निशिकांत दुबे को पहली बार संसद रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि सांसद विद्युत् वरण महतो को 5वीं बार यह सम्मान प्राप्त हुआ है. विशेष बात यह है कि इस सम्मान के साथ ही सांसद विद्युत् वरण महतो सबसे अधिक बार संसद रत्न पुरस्कार से सम्मानित होने वाले सांसद बन गए हैं. उन्हें लगातार 5वीं बार यह सम्मान मिला है. 

कैसे राजनीति के धुरंधर बने विद्युत् वरण महतो

बताते चलें विद्युत् वरण महतो जमशेदपुर से लगातार तीसरी बार सांसद बने हैं. आज उनकी इस सफलता की चर्चा हर कोई कर रहा है, लेकिन शायद बहुत कम ही लोग होंगे, जिन्हें विद्युत् वरण महतो की इस सफलता के पीछे छिपे संघर्ष और कड़ी मेहनत के बार में पता होगा. ये तीन या चार सालों का आशियाना नहीं है, बल्कि इसे हासिल करने में दशकों की कड़ी मेहनत लगी है. इस बीच उन्हें कई बार हार का सामना भी करना पड़ा, लेकिन न तो उन्होंने हार मानी और न ही अपने कदम पीछे किये. नतीजन आज वह राजनीति के धुरंधर बन गए हैं.  

झामुमो के साथ शुरू हुआ था सफ़र 

विद्युत् वरण महतो के राजनीतिक सफ़र की बात करें तो उन्होंने झामुमो के साथ इस सफ़र की शुरुआत की थी. झारखंड अलग राज्य की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में भी इन्होंने अहम भूमिका निभाई. झारखंड राज्य के सबसे पहले चुनाव 2000 में उन्होंने बहरागोड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार मिली. इसके बाद साल 2005 में फिर चुनावी मैदान उतरे, लेकिन एक बार वापस जनता ने उन पर भरोसा नहीं जताया. लगातार दो बार चुनाव हारने के बाद भी विद्युत वरण महतो ने रुकना या कदम पीछे लेना स्वीकार नहीं किया.  

इसके बाद वर्ष 2009 में वापस विधानसभा चुनाव हुए. और एक बार फिर उसी ताकत और जोश के साथ वह चुनावी मैदान में आये. इस बार किस्मत और जनता दोनों ही उन पर मेहरबान हो गयी. आख़िरकार उन्हें विस चुनाव में जीत मिली और वह विधासभा पहुंच गए. इसके बाद वह हमेशा जनता की समस्याओं को लेकर मुखर रहे और धीरे-धीरे उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत होती चली गयी.

पार्टी बदलते ही चमकी किस्मत 

विद्युत् वरण महतो के राजनीतिक सफ़र में एक बड़ा मोड़ भी आया, जब उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले JMM का साथ छोड़ BJP का दामन थाम लिया. भाजपा ने उन्हें जमशेदपुर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा. पार्टी बदलने के बाद भी जमशेदपुर की जनता ने उन पर भरोसा जताया और जमकर प्यार बरसाया.  तत्कालीन सांसद अजय कुमार को पहले प्रयास में ही हराकर विद्युत् वरण महतो लोकसभा पहुंच गए. 

इसके बाद उन्होंने अब तक कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. एक के बाद एक लगातार वह तीन लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. संसदीय कामकाज में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पहली बार उन्हें वर्ष 2022 में संसद रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके बाद से हर वर्ष लगातार संसद रत्न पुरस्कार की लिस्ट में उनका नाम आने लगा. इसी क्रम में इस बार उन्हें लगातार 5वीं बार इस सम्मान से सम्मानित किया गया है. 

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