जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, भरनो के लोंगा विद्यालय के 228 बच्चे...

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जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, भरनो के लोंगा विद्यालय के 228 बच्चे, जर्जर भवन दे रहा हादसे को न्योता

बरसात के मौसम में भवन की छत और दीवारों से प्लास्टर गिरने की घटनाएं लगातार हो रही हैं

जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं भरनो के लोंगा विद्यालय के 228 बच्चे जर्जर भवन दे रहा हादसे को न्योता

प्रेम कुमार सिंह/न्यूज 11 भारत.

भरनो/डेस्क: भरनो प्रखंड के आताकोरा पंचायत स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय लोंगा में पढ़ने वाले 228 छात्र-छात्राओं का भविष्य इन दिनों गंभीर खतरे के साये में है. विद्यालय का भवन काफी जर्जर हो चुका है,लेकिन इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई उसी भवन में कराई जा रही है.बरसात के मौसम में भवन की छत और दीवारों से प्लास्टर गिरने की घटनाएं लगातार हो रही हैं,जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है.भरनो प्रखंड मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित इस विद्यालय में कुल 228 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं.बच्चों की पढ़ाई के लिए विद्यालय में चार शिक्षक कार्यरत हैं.

विद्यालय भवन में कुल 12 कमरे हैं,जिनमें से सात कमरे जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं.मजबूरीवश इन्हीं कमरों में बच्चों को बैठाकर कक्षाएं संचालित की जा रही हैं.ग्रामीणों के अनुसार बरसात के दौरान कई बार छत और दीवारों से प्लास्टर टूटकर नीचे गिर चुका है.भवन की कई जगहों पर छत का सरिया (छड़) भी बाहर निकल आया है,जिससे भवन की स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई है.ऐसे माहौल में बच्चे और शिक्षक हर दिन भय के बीच पढ़ाई और शिक्षण कार्य करने को विवश हैं. वहीं विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक राजेश ठिठीयों ने बताया कि विद्यालय भवन की मरम्मत एवं नए भवन के निर्माण के लिए कई बार शिक्षा विभाग,जनप्रतिनिधियों तथा विभाग के कनीय अभियंता को लिखित रूप से अवगत कराया गया है.

इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है.उन्होंने कहा कि भवन की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और यदि समय रहते मरम्मत या नया भवन नहीं बनाया गया तो कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है.इधर विद्यालय प्रबंधन समिति,अभिभावकों एवं ग्रामीणों ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है.उनका कहना है कि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा जब बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा.उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से अविलंब जर्जर भवन की मरम्मत कराने अथवा नए विद्यालय भवन का निर्माण शुरू कराने की मांग की है.ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो किसी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी.फिलहाल लोंगा गांव के सैकड़ों बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा प्राप्त करने को मजबूर हैं.अब सबकी निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं.

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