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रांची/डेस्क: 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर एक खबर की चर्चा जोरों पर है, जिसके बाद देश का राजनीति में खलबली मच गई है. खबर है कि लोकसभा चुनाव के साथ 22 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के के भी चुनाव होंगे. खबर यह भी है कि केन्द्र सरकार ने इसकी तैयारी भी कर ली है. केन्द्र सरकार NDA शासित राज्यों या केन्द्र शासित राज्यों में चुनाव कराने की तैयारी कर रही है. बता दें कि भाजपा के कुछ मुख्यमंत्रियों ने समय से पहले विधानसभा भंग किए जाने पर सहमति दे दी है. गोवा, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली इन राज्यों में शामिल हैं.
अगर यह खबर सही तो इसका मतलब है कि कई राज्यों और केंद्र शासित राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल पहले खत्म करना होगा. NDA-शासित 22 राज्यों/केंद्र शासित राज्यों में से 11 में 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले ही चुनाव कराने होंगे. सिर्फ 4 एनडीए शासित राज्यों- आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव होंगे.
कानूनी प्रक्रिया की बात करें तो 22 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों की विधानसभाओं को जनवरी 2029 तक भंग करना होगा. क्योंकि विधानसभा भंग होने के 6 महीने के अंदर वहां चुनाव कराना होता है. संविधान का अनुच्छेद 174 (2)(ब) राज्यपाल को विधानसभा भंग करने की शक्ति देता है. फिर भी, अगर ऐसा होता है ति गोवा, गुजरात, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल का क्या होगा? क्योंकि वहां का कार्यकाल 3 साल से भी ज्यादा छोटा हो जाएगा. इतना ही नहीं, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मेघालय, नगालैंड, राजस्थान और त्रिपुरा का कार्यकाल तो 4 साल छोटा हो जाएगा, क्योंकि इन राज्यों में 2027 और 2028 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. विपक्ष शासित राज्यों में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मिजोरम और तेलंगाना शामिल हैं. अगर यहां चुनाव साथ कराए जाएंगे तो यहां भी विधानसभा 3 से 4 साल पहले भंग करनी होगी.
कांग्रेस ने खबरों को नकारा, साथ चुनाव कराने से इनकार
लोकसभा और विधानसभा चुनाव को साथ कराए जाने की खबरों पर कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए इन खबरों को काल्पनिक बताया है. कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने साफ कहा कि कांग्रेस 'एक देश, एक चुनाव' के खिलाफ है. यह असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और जवाबदेही के खिलाफ है. हम शुरू से इस व्यवस्था के खिलाफ था और इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.
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