पश्चिम बंगाल की राजनीति में क्या बरकरार रहेगा ममता बनर्जी का दबदबा? क्या चलेगा B...

पश्चिम बंगाल की राजनीति में क्या बरकरार रहेगा ममता बनर्जी का दबदबा? क्या चलेगा BJP का जादू..बांग्लादेश बवाल का होगा असर!

पश्चिम बंगाल की राजनीति में क्या बरकरार रहेगा ममता बनर्जी का दबदबा क्या चलेगा bjp का जादूबांग्लादेश बवाल का होगा असर

न्यूज़11 भारत
कोलकाता/डेस्क:
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस समय अपने तीसरे कार्यकाल में हैं और राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव इसी वर्ष अप्रैल में प्रस्तावित हैं. यदि ममता बनर्जी एक बार फिर सत्ता में वापसी करती हैं, तो वे दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का रिकॉर्ड तोड़ देंगी. शीला दीक्षित ने 15 वर्ष 25 दिन तक मुख्यमंत्री पद संभाला था.

बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) फिलहाल एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लगातार चुनौती देती रही है. वर्ष 2011 में ममता बनर्जी ने तीन दशकों से अधिक समय तक बंगाल की सत्ता पर काबिज वामपंथी गठबंधन 'लेफ्ट फ्रंट' को सत्ता से बाहर कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. इसके बाद से राज्य की सत्ता पर उनका वर्चस्व बना हुआ है.

देशभर में BJP के उभार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के बावजूद ममता बनर्जी ने न सिर्फ अपनी पकड़ मजबूत रखी, बल्कि टीएमसी को भी बंगाल में मजबूती से स्थापित किया.

2021 में नहीं चला भाजपा का जादू
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बंगाल में पूरी ताकत झोंक दी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ और जमीनी नेताओं ने व्यापक चुनाव प्रचार किया. चुनावी माहौल में बदलाव के संकेत भी नजर आए और इसका असर नतीजों में दिखाई दिया. भाजपा की सीटें 2016 की तुलना में 2 से बढ़कर 77 तक पहुंच गईं.

हालांकि, TMC की सीटों में गिरावट आई, लेकिन ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रहीं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यह जीत पूरी तरह करिश्मे का परिणाम नहीं, बल्कि मुस्लिम मतदाताओं के बड़े पैमाने पर टीएमसी के पक्ष में ध्रुवीकरण का नतीजा थी. बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 30 प्रतिशत है.

2021 के चुनाव में टीएमसी को करीब 49 प्रतिशत वोट मिले, जबकि BJP लगभग 10 प्रतिशत कम वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. भाजपा के कड़े विरोध के बावजूद मिली इस जीत से उत्साहित ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ी भूमिका निभाने और प्रधानमंत्री पद के सपने देखने शुरू कर दिए थे.

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