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लाइफ्स्टाइल/डेस्क: कभी किसी दोस्त के घर या किसी रिश्तेदार के घर जाते ही आपको वहां की खास खुशबु महसूस हुई है? ऐसा कई बार होता है कि हम जब भी किसी के यहां जाते हैं, तो उनके घर की अलग खुशबु महसूस होती है. मगर अपने घर पर ऐसा महसूस नहीं होता है. दिलचस्प बात यह है कि यह स्मेल हर घर में मौजूद चीजों और वहां रहने वाले लोगों की आदतों से एक खास तरह की 'Smell Identity' बन सकती है.
अपने घर की खुशबु हमें महसूस क्यों नहीं होती?
हमें दूसरो के घर की खुशबु महसूस भी रहता और याद भी रहता है. मगर अपने लेकिन अपने घर का इसलिए नहीं महसूस होता है, क्योंकि हम वहां रोज़ रह रहे होते हैं. और जब हम किसी के गंध के संपर्क में रहने लग जाते हैं, तो हम उसे नजरअंदाज करना शुरू कर देते हैं. इसी प्रक्रिया को कहा जाता है 'Olafactory Adaption' इसका मतलब होता है, खुशबु के प्रति अभ्यस्त हो जाना. जैसे हम किसी के घर के स्मेल को महसूस कर पाते हैं. वैसे ही जब कोई बाहर से हमारे घर आता है, तो उसे हमारे घर की नई खुशबु तुरंत महसूस होती है.
खुशबु का यादों से भी गहरा रिश्ता होता है
यह जरूरी नहीं है किसी के घर की खुशबु सिर्फ उसकी पहचान बनाती है. बल्कि वही खुशबु किसी के लिए याद भी बन सकता है. जैसे कि नानी के घर की खुशबु , किसी अपने परफ्यूम की खुशबु, या मां के बनाए खाने की खुशबु. यह वो 'Smell Identity' होती है जो हमारे भावनाओं से जुड़ी होती है.
इसलिए आपको अब अगर किसी व्यक्ति के घर से कोई नई खुशबु महसूस होती है. तो उसे साधारण न समझे क्योंकि वह खुशबु किसी घर की पहचान है.