ट्रंप का ‘टैरिफ ट्विस्ट’! दवाओं पर 100% टैक्स का झटका, मेटल सेक्टर को थोड़ी राहत

ट्रंप का ‘टैरिफ ट्विस्ट’! दवाओं पर 100% टैक्स का झटका, मेटल सेक्टर को थोड़ी राहत

ट्रंप का ‘टैरिफ ट्विस्ट’ दवाओं पर 100 टैक्स का झटका मेटल सेक्टर को थोड़ी राहत 

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी ट्रेड पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मचा दी हैं. नए आदेश के तहत विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100% तक का भारी टैरिफ लगाने का फैसला लिया गया हैं. इस कदम का सीधा असर उन फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा, जो अमेरिका के बाहर दवाओं का उत्पादन करती हैं. 

फार्मा कंपनियों के लिए सख्त संदेश
ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि दवा कंपनियों को अब दो बड़े बदलाव करने होंगे- पहला, दवाओं की कीमतों में कमी और दूसरा, उत्पादन को अमेरिका के भीतर शिफ्ट करना. जो कंपनियां इन नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करेंगी, उन्हें भारी टैक्स और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा. आंशिक उत्पादन शिफ्ट करने वाली कंपनियों पर 20% टैक्स लगेगा और नियमों का उल्लंघन करने पर 100% टैरिफ लगेगा. सरकार का दावा है कि इससे न केवल दवाएं सस्ती होंगी, बल्कि घरेलू स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

मेटल सेक्टर को राहत, उद्योगों को फायदा
फार्मा सेक्टर में सख्ती के साथ ही ट्रंप ने मेटल इंडस्ट्री को राहत दी हैं. स्टील, एल्युमिनियम और तांबे जैसे उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 25% कर दिया गया हैं. साथ ही, जिन उत्पादों में मेटल की मात्रा 15% से कम है, उन्हें पूरी तरह टैक्स से छूट दी गई हैं. इस फैसले का मकसद घरेलू उद्योगों को सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराना और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मजबूती देना हैं. 

पुराने फैसले से सबक, नए नियम की पृष्ठभूमि
इस नए आदेश के पीछे एक अहम कारण भी हैं. दरअसल, पिछले साल ‘लिबरेशन डे’ के नाम पर लागू किए गए टैरिफ को लेकर विवाद हुआ था. यह फैसला अमेरिका की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा, जहां इसे अवैध करार दे दिया गया. इस निर्णय के बाद अमेरिकी सरकार को करीब 166 अरब डॉलर वापस करने की नौबत आ गई. अब इस आर्थिक झटके की भरपाई और व्यापारिक संतुलन साधने के लिए नए टैरिफ नियम लागू किए गए हैं. 

कंपनियों को मिला अल्टीमेटम
सरकार ने बड़ी फार्मा कंपनियों को 120 दिन और छोटी कंपनियों को 180 दिन का समय दिया हैं. इस अवधि के बाद ही नई टैक्स दरें पूरी तरह लागू होंगी. प्रशासन इसे “रीसेट बटन” मान रहा है, जिससे पुराने व्यापार घाटे को संतुलित किया जा सके. इस फैसले पर यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के लिए कुछ राहत दी गई है, जहां टैरिफ की सीमा 15% तय की गई हैं. हालांकि, कई व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है कि अचानक टैक्स बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो सकती है और आम लोगों पर बोझ बढ़ेगा.

बाजार में अनिश्चितता, आगे क्या?
ट्रंप के इस फैसले ने वैश्विक व्यापार बाजार में नई बहस छेड़ दी हैं. अब नजर इस बात पर है कि विदेशी कंपनियां इन कड़े नियमों को स्वीकार करती है या फिर अमेरिकी बाजार में दवाओं और अन्य उत्पादों की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

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