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रांची/डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने ही फैसले में बड़ा बदलाव करते हुए दर्जनों दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर लगाए गए आयात शुल्क को कम कर दिया. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका में लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर भारी बोझ डाल दिया था. ट्रंप प्रशासन की ओर से टैरिफ में की गई इस कटौती से अमेरिकी नागरिकों को अब महंगाई से कुछ राहत मिलने की उम्मीद हैं.
कॉफी और ट्रॉपिकल फलों पर घटा टैरिफ
ट्रंप ने बीफ, कॉफी, ट्रॉपिकल फ्रूट्स और कई अन्य आवश्यक वस्तुओं पर लगे भारी टैरिफ को कम करने का निर्णय लिया हैं. बीते कुछ महीनों में अमेरिका में रोजमर्रा के सामान की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, जिसका असर हाल ही में हुए नॉन-ईयर इलेक्शन में भी दिखा. वर्जीनिया और न्यू जर्सी में ऊंची कीमतों से नाराज मतदाताओं ने डेमोक्रेट्स को बड़ी जीत दिलाई, जिससे ट्रंप पर दबाव बढ़ गया.
अप्रैल में लगाए गए टैरिफ बने थे संकट की जड़
अप्रैल 2025 में ट्रंप ने अधिकांश देशों से आने वाले उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगा दिया था. ट्रंप प्रशासन का दावा था कि इन शुल्कों से उपभोक्ता कीमतों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होगी, लेकिन आर्थिक आंकड़ों ने इस दावे को गलत साबित किया. बीफ सहित कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतें अचानक तेजी से बढ़ीं, जिसने महंगाई को और विकराल बना दिया.
बीफ की ऊंची कीमतों से बढ़ी चिंता
अमेरिका में बीफ की रिकॉर्ड ऊंची कीमतें हाल के दिनों में सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी थी. अमेरिका, जो ब्राज़ील से भारी मात्रा में बीफ आयात करता है, वहां टैरिफ बढ़ने से दाम तेजी से बढ़े. ट्रंप ने स्वीकार किया था कि बीफ की कीमतों को काबू में लाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे. टैरिफ में कटौती की आधिकारिक सूची में बीफ, कॉफी, चाय, कोको, केले, संतरे, टमाटर, फलों के रस, मसाले और कुछ उर्वरकों सहित कई ऐसे उत्पाद शामिल है, जो अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादित नहीं होते.
चार देशों के साथ नया समझौता
टैरिफ घटाने के फैसले के साथ ही ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अमेरिका ने इक्वाडोर, ग्वाटेमाला, अल सल्वाडोर और अर्जेंटीना के साथ कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने की रूपरेखा समझौता किया हैं. ट्रंप ने इस सप्ताह इशारा किया था कि वे अमेरिकी बाजार में कॉफी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए उस पर लगने वाला शुल्क घटाने वाले हैं. इस बड़े फैसले से महंगाई से परेशान अमेरिकी नागरिकों को राहत मिलेगी या नहीं, इसका पता आने वाले हफ्तों में बाजार के रुझानों से साफ हो जाएगा लेकिन इतना तय है कि चुनावी दबाव और बढ़ती कीमतों ने ट्रंप प्रशासन को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया हैं.
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