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रांची/डेस्क: मध्य प्रदेश अब सिर्फ अपनी समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली इतिहास और मेहमाननवाजी के लिए ही नहीं, बल्कि एक चौंकाने वाली वजह से भी सुर्खियों में है और वह है बढ़ती गालीबाजी. एक हालिया सर्वे ने समाज की भाषा और व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सर्वे के मुताबिक, प्रदेश के करीब 48 प्रतिशत लोग रोज़मर्रा की बातचीत में गालियों का इस्तेमाल करते हैं. इस सूची में राजधानी भोपाल सबसे आगे है, जहां 63 प्रतिशत लोगों ने गालियां देने की बात स्वीकार की हैं. इसके बाद ग्वालियर, इंदौर, शिवपुरी, नरसिंहपुर, सीहोर, दमोह, सागर, रीवा और रतलाम जैसे जिले भी “टॉप गालीबाज़” जिलों में शामिल हैं. रिपोर्ट यह भी बताती है कि गाली देने का चलन केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है, जहां 68 प्रतिशत पुरुष गालियों का इस्तेमाल करते हैं. वहीं 28 प्रतिशत महिलाएं भी इस प्रवृत्ति का हिस्सा बन चुकी हैं. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मां, बहन और बेटी से जुड़े अपशब्द अब आम बोलचाल की भाषा में शामिल होते जा रहे हैं.
अब सवाल उठता है कि यह भाषा आखिर आ कहां से रही है? सर्वे में 42 प्रतिशत युवाओं ने माना कि उन्होंने गालियां ओटीटी प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और फिल्मों से सीखी हैं.
डिस्क्लेमर: यह पोस्ट गालीबाजी को बढ़ावा देने के लिए नहीं हैं. गाली देना अच्छी बात नहीं हैं. इसका उद्देश्य केवल एक सर्वे की जानकारी साझा करना और समाज को भाषा व व्यवहार को लेकर जागरूक करना हैं.
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