यही रात अंतिम यही रात भारी! Exit Poll में बढ़त के बावजूद टेंशन में हैं पार्टियां...

यही रात अंतिम यही रात भारी! Exit Poll में बढ़त के बावजूद टेंशन में हैं पार्टियां! इस बात की चिंता वाकई में क्या निकलेगा

यही रात अंतिम यही रात भारी exit poll में बढ़त के बावजूद टेंशन में हैं पार्टियां इस बात की चिंता वाकई में क्या निकलेगा

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क : पांच राज्यों की विधानसभा चुनाव में पार्टियों को जो दांव-पेंच चलना था, चल लिए, उसके बाद मतदाताों ने अपना जनादेश भी दे दिया.उनका जनादेश क्या है, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) नामक डब्बे में बंद है. ईवीएम के अन्दर क्या है, जब यह खुलेगा तो किसकी किस्मत चमकेगी और किसके सितारे गर्दिश में होंगे, 4 मई यानी अब से कुछ घंटों के बाद सामने आ जाएगा. वोटिंग के बाद पांच राज्यों के एग्जिट पोल भी आ गये हैं, ये पोल कुछ पार्टियों का तो उत्साह बढ़ा रहे हैं, और कुछ इससे हताश हो गये हैं. लेकिन क्या चुनाव के परिणाम वही होंगे, जो एग्जिट पोल बता रहे हैं?

ऐसा पहली बार नहीं हुई है जब एग्जिट पोल ने पार्टियों को चने के झाड़ पर चढ़ाकर जमीन पर ला पटका हो. सभी पार्टियां इसीलिए एग्जिट पोल के नतीजों के खुश होने के बाद भी सशंकित तो जरूर हैं. पश्चिम बंगाल के 2021 के चुनाव को ही ले लीजिए. किसी भी एग्जिट पोल ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को प्रचंड जीत हासिल करने का अनुमान नहीं जताया था, वहीं बीजेपी को एग्जिट पोल ने टीएमसी से टक्कर लेने का अनुमान जताया था, लेकिन जब ईवीएम खुले तो उसमें से जो निकला वह टीएमसी के लिए बड़ी भारी जीत थी. 294 सीटों में से 215 टीएमसी ने झटक लिए और बीजेपी 77 सीटों के साथ बंगाल में पहली बार इंट्री मारने से चूक गयी.

मगर यहां यह नहीं भूलना चाहिए कि 2021 और 2026 के चुनाव में काफी अंतर है. जिस दबदबे के साथ ममता बनर्जी ने 2021 का चुनाव लड़ा था, उसके मुकाबले परिस्थितियां अबकी बार काफी बदली हुई हैं. बंगाल वही है, बंगाल के लोग भी वही है, लेकिन शायद बंगाल के हालात वह नहीं हैं, जो जिसने ममता बनर्जी को अजेय बना रखा था. इसका 'थोड़ा फायदा' अगर 'थोड़ा बड़ा' हो गया तो ममता बनर्जी के हाथ से तोते उड़ने तय हैं. लेकिन कहा न यह बंगाल है, यहां पर हवा ही बिल्कुल अलग है. यहां के लोग बोलने में कम, काम करने में विश्वास ज्यादा करते हैं, अब यही देखना है कि हर बार जो दिख रहा था, और इस बार जो दिख रहा है, उसमें क्या वाकई कोई अन्तर है. अगर अन्तर है तब तो यह बीजेपी के लिए खुश होने की वजह हो सकती है. लेकिन बंगाल की जनता ने कहा क्या, यह अभी ठीक से सुनाई नहीं दे रहा है, इसीलिए बीजेपी भी अभी ज्यादा मुखर होकर कुछ नहीं कर रही है.

दूसरे राज्यों की बात करें तो असम और पुडुचेरी के परिणाम बीजेपी के पलड़े में झुके दीख रहे हैं. रही बात केरल और तमिलनाडु की तो दोनों राज्यों में परिणाम एग्जिट पोल की तरह भी आ सकते हैं और चौंका सकते हैं. क्योंकि एग्जिट पोल में केरल में LDF और UDF के बीच ज्यादा का अंतर नहीं दीख रहा है. यही तोला-माशा का अन्तर हार-जीत के आंकड़े बदल सकता है. रही बात तमिलनाडु की तो माना तो जा रहा है कि डीएमके फिर से सत्ता में आ रही है, और अगर ऐसा होता है तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी, लेकिन यहां पर असली पेंचअभिनेता से नेता बने थाला विजय की पार्टी टीवीके ने फंसा रखा है. भले ही कुछ एग्जिट पोल ने टीवीके कुछ खास नहीं कर रही है, लेकिन एक दो एग्जिट पोल ने टीवीके के लिए चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है. अगर ऐसा होता है तो यह डीएमके के लिए बड़ा झटका हो सकता है. भले ही वह सत्ता में बनी रहे, लेकिन सीटों का बड़ा नुकसान उसे उठाना पड़ सकता है. और अगर वाकई में ऐसा होता है तो ज्यादा नुकसान डीएमके के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है.

खैर, जिस प्रकार एग्जिट पोल राजनीतिक अनुमान की तरह है, उसी प्रकार चुनाव परिणाम आने से पहले की जाने वाली तमाम चर्चा भी एक अनुमान ही है. वैसे पार्टियों को यह पता तो होता ही है कि हवा किस ओर बह रही है, फिर भी उन्हें चुनाव परिणाम आने तक का इन्तजार तो करना ही पड़ता है. इस बार भी कर रहे हैं. बस, अब कुछ घंटे बचे हैं, उसके बाद सबकुछ पानी की तरह साफ हो जाएगा.

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