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पटना/डेस्क: अभी एक दिन पहले खबर आयी कि बाहर के टीचर कुत्तों की गिनती करेंगे. दरअसल ऐसा आदेश बिहार में कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके आतंक को लेकर दिया गया है. मगर ऐसी हालत सिर्फ बिहार की ही नहीं है, पूरे देश में कुत्तों से लोग परेशान हैं और इसको लेकर निचली अदालतों, हाई कोर्ट ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट तक में अर्जियां डाली जा रही हैं कि कोर्ट इस पर एक्शन लेकर कुत्तों के आतंक से बचाये.
कोर्ट में कुत्तों को लेकर पड़ रही अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी हैरानी जतायी है. उसने यहां तक कह दिया कि लोग जितनी फिक्र कुत्तों की कर रहे हैं, इतनी फिक्र तो इनसानों की भी नहीं की जाती. यह टिप्पणी एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों ने की है. सुप्रीम कोर्ट का कहनाहै कि आजकल कुत्तों को लेकर जितनी अर्जियां आ रही हैं, उतनी तो इनसानी समस्याओं को लेकर भी नहीं आतीं.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता एक केस की सुनवाई कर रहे थे. तभी वकीलों ने आवारा कुत्तों का मुद्दा उठाते हुए अंतरिम आवेदन का जिक्र किया. इस पर जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की कि कुत्तों को लेकर आवेदनों की बाढ़ आ गयी है. कुत्तों से हो रही समस्याओं को लेकर जितनी अर्जियां आ रही हैं, वह हैरान करने वाली है. फिर भी उन्होंने आश्वासन दिया कि बुधवार को इस मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई होगी औरसभी पक्षों की बात सुनी जायेगी. इसके लिए एक विशेष बेंच तैयार की गयी है जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया शामिल होंगे. जब
कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी जारी कर चुका है निर्देश
पिछले कुछ महीनों से आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई निर्देश जारी किये गये हैं. इसकी शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली से हुई थी. उसके बाद तो देश के अनेक हिस्सों से कुत्तों की समस्याएं सुप्रीम कोर्ट पहुंचने लगी. जिस पर कोर्ट ने आवश्यक निर्देश भी जारी किये है, मसलन...
- स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशनों के आसपास से कुत्तों को हटाया जाये और उन्हें शेल्टर होम भेजा जाये.
- नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें वापस उसी जगह न छोड़ा जाए.
- हाईवे और एक्सप्रेसवे पर मवेशियों को खुला घूमने नहीं दिया जाए.
- कुत्तों के काटने की घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की विफलता का परिणाम हैं.
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