राज्यसभा में बढ़ी NDA की ताकत! अब बिलों को पास कराना होगा और आसान, विपक्ष की बढ़ गईं मुश्किलें

राज्यसभा में बढ़ी NDA की ताकत! अब बिलों को पास कराना होगा और आसान, विपक्ष की बढ़ गईं मुश्किलें

राज्यसभा में बढ़ी nda की ताकत अब बिलों को पास कराना होगा और आसान विपक्ष की बढ़ गईं मुश्किलें

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में आ जाने के बाद सदन में NDA की ताकत और बढ़ गयी है. हालांकि अभी 3 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा ज्वाइन किया है, 4 सांसदों का तकनीकी कारणों से पार्टी बदलना अभी सम्भव नहीं हो पाया है, मगर जब इनकी भी भाजपा में इन्ट्री हो जाएगी तक आम आदमी पार्टी की ताकत तो सदन में घटेगी, एनडीए की ताकत उच्च सदन में और बढ़ जायेगी. इस नए समीकरण के बाद भाजपा की संख्या उच्च सदन में 113 हो जाएगी. यानी अब एनडीए के लिए अपने विधेयकों का पारित कराना और भी आसान हो जायेगा. हालांकि आप इस दलबदल को चुनौती दो रही है, लेकिन यह दलबदल कानूनी रूप से वैध है. क्योंकि यह दसवीं अनुसूची के तहत वैध है. बता दें कि राज्यसभा में आप की सदस्य संख्या दलबदल से पहले 10 थी, जो कि अब घटकर 3 हो जाएगी.

बता दें कि आम आदमी पार्टी छोड़कर राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में नितिन नबीन की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. राघव चड्ढा ने इस मौके पर कहा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों में से दो-तिहाई ने पार्टी छोड़ दी है राघव चड्ढा ने कहा कि पार्टी सांसद हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल भी आम आदमी पार्टी छोड़ रहे हैं.

दलबदल की स्थिति में क्या है अयोग्यता की शर्तें

दलबदल कानून संविधान की 10वीं अनुसूची (52वां संशोधन, 1985) के तहत आता है. इसके अनुसार,  यदि कोई सांसद अपनी मर्जी से पार्टी छोड़ता है या व्हिप के खिलाफ वोट करता है, तो उसकी सदस्यता जा सकती है. हालांकि, यदि 2/3 सदस्य एक साथ दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो सदस्यता सुरक्षित रह सकती है. 

हालांकि राज्यसभा के बारे में एक बात यह भी ध्यान देने वाली है कि भले ही आज की राजनीति में राज्यसभा के सदस्य मुख्य रूप से राजनीतिक पार्टियों द्वारा ही भेजे जाते हैं. जबकि संवैधानिक रूप से राज्य सभा सदस्यों का निर्वाचन पार्टियों द्वारा नहीं, बल्कि राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है.

खैर, राघव चड्ढा समेत अन्य आप के राज्यसभा 7 सांसदों का औपचारिक रूप से भाजपा में विलय होने से दसवीं अनुसूची के तहत दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता को पूरा करता है. यानी ये सांसद अयोग्यता से बच गए हैं. 

भाजपा को उच्च सदन में मिली और मजबूती

इस राजनीतिक विलय से भाजपा को राज्यभा में और मजबूती मिली है, राज्यसभा में इस मजबूती का फायदा अब कानूनों को पारित करने में मिलेगा. यानी बिलों को पास कराना एनडीए के लिए और आसान हो गया है. दूसरी ओर यह सिर्फ आप के लिए झटका नहीं है, बल्कि यह विपक्ष के लिए भी बड़ा झटका है. क्योंकि उच्च सदन में उसकी ताकत घटी है. 

आप छोड़ने वाले राज्यसभा सांसद

  1. राघव चड्ढा (पंजाब)
  2. हरभजन सिंह (पंजाब)
  3. संदीप पाठक (पंजाब)
  4. अशोक मित्तल (पंजाब)
  5. राजिंदर गुप्ता (पंजाब)
  6. विक्रम साहनी (पंजाब)
  7. स्वाति मालीवाल (दिल्ली)

अब राज्यसभा में AAP के सांसद

  1. संजय सिंह (दिल्ली)
  2. नारायण दास गुप्ता (दिल्ली)
  3. बलबीर सिंह सीचेवाल (पंजाब)

यह भी पढ़ें: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष का एक और प्रयास, राज्यसभा में दिया नया नोटिस

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