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रांची/डेस्कः- हल्दी सिर्फ खाने में स्वाद लाने के लिए प्रयोग में लाई जाने वाला मसाला नहीं है बल्कि सदियों से घर घर में इसका इस्तेमाल दवा के रुप में होता चला आया है. आमतौर पर तो हमलोग हल्दी पाउडर का इस्तेमाल करते हैं लेकिन आजकल कच्ची हल्दी का ट्रेंड बढता नजर आ रहा है. कई रिसर्च से पता चला है कि कच्ची हल्दी पेट के सूजन को कम करने के लिए व पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जिन लोगों को अक्सर अपच, गैस व एसिडिटी की समस्या रहती है उनके लिए अदरक जैसी दिखने वाली हल्दी नेचुरल राहत दे सकती है. इसके खाने के कई फायदें हैं. आइए जानते हैं कितना फायदेमंद है कच्ची हल्दी..
कम करती है सूजन:
इसमें पाए जाने वाले करम्युमियम जो कि एक ताकतवर एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व है पेट की सूजन कम करने में असरदार साबित होती है. पेट की जलन व इरिटेशन को शांत करती है. गेस्ट्राइटिस जैसी समस्याओं से निजात दिलाती है. जन लोगों के पेट में हमेशा से जलन व सूजन रहती है उनके लिए कच्ची हल्दी बड़ा फायदेमंद साबित हो सकती है.
अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाती है:
कच्ची हल्दी आंत में मौजूद बैक्टिरिया जैसे लैक्टोबैसिलस और बिफीडोबैक्टीरियम को बढ़ाने में मददगार साबित होती है. इससे पाचन मजबूत होती है और भोजन से पोषक तत्वों का बेहतर ऑब्जर्व हो पाता है. साथ ही इससे इम्युनिटी भी मजबुत रहती है और मेटाबॉलिज्म भी अच्छे से काम करता है. आंत में अच्छे बैक्टिरिया का बढ़ना पूरे पाचनतंत्र को हेल्दी बनाता है.
नेचुरल एंटीबैक्टीरियल गुण:
कच्ची हल्दी में नेचुरल एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो शरीर में हानिकारक जीवाणुओं को कम करने में मददगार साबित होती है. अगर पेट में बार बार इंफेक्शन व बैक्टिरियल समस्या होती है तो कच्ची हल्दी का सेवन फायदेमंद साबित होता है. इससे आंत भी मजबूत बनता है. कई स्टडीज में हल्दी आंत के दीवार को मजबूत बनाने में सहायक साबित होती है. गैस व पेट की सूजन को कम करती है, सुबह के समय पेट आसानी से साफ करने में भी मददगार साबित होती है. आंत को मजबूत बनाना ओवरऑल डाईजेशन को मजबुत बनाने का एक अहम कदम है.
ज्यादा हल्दी खाने से पेट में जलन व एसिडीटी की भी संभावना बढ़ सकती है. स्तनपान व गर्भवती महिला को कच्ची हल्दी कम मात्रा में सेवन करनी चाहिए.
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