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रांची/डेस्क: देश में हाल ही में हुए दो विमान हादसों के बाद अब विमानन सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं. जनवरी में महाराष्ट्र में हुए हादसे में डिप्टी सीएम समेत 5 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 24 फरवरी को झारखंड के चतरा में हुए विमान हादसे में 7 लोगों की जान गई. इन घटनाओं के बाद DGCA ने नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटरों के लिए नई सुरक्षा निर्देशावली जारी की हैं.
नए सुरक्षा निर्देशों की मुख्य बातें:
सुरक्षा प्राथमिकता में सबसे ऊपर
DGCA ने साफ कहा है कि सुरक्षा सभी वाणिज्यिक लाभ, चार्टर प्रतिबद्धताओं या VIP फ्लाइट्स से ऊपर रखी जानी चाहिए. किसी भी विमान का उड़ान रद्द, मोड़ या विलंब करने का निर्णय पायलट-इन-कमांड का अंतिम अधिकार होगा और इसका सम्मान किया जाना अनिवार्य हैं.
सुरक्षा जानकारी का पारदर्शी प्रदर्शन
नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटरों (NSOP) को अपनी वेबसाइट पर विमान की आयु, रखरखाव इतिहास और पायलट अनुभव जैसी महत्वपूर्ण सुरक्षा जानकारी साझा करनी होगी. इसका उद्देश्य ग्राहकों को पूरी तरह सूचित करना हैं.
सुरक्षा रैंकिंग और ऑडिट
DGCA अब सभी NSOP ऑपरेटरों के लिए सुरक्षा रैंकिंग तंत्र लागू करेगा. इसके मानदंड और परिणाम वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएंगे. इसके अलावा कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) ऑडिट, ADS-B डेटा, ईंधन रिकॉर्ड और तकनीकी लॉग की क्रॉस-वेरिफिकेशन की जाएगी.
जवाबदेही तय करना
वरिष्ठ प्रबंधन और ऑपरेटरों को सिस्टमेटिक गैर-अनुपालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा. अब केवल पायलटों को दोषी नहीं माना जाएगा.
पायलट और ऑपरेटरों के लिए सख्त कार्रवाई
फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) का उल्लंघन करने वाले पायलटों का लाइसेंस 5 साल तक निलंबित किया जा सकता हैं. इसके अलावा सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले ऑपरेटरों के लाइसेंस/परमिट निलंबित किए जा सकते हैं.
विमानों और MRO की निगरानी
पुराने विमानों और उनके स्वामित्व परिवर्तन पर बढ़ी हुई निगरानी लागू होगी. रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) में कमी पाई जाने पर ऑपरेटरों को अनुमोदित बाहरी MRO सेवाओं का उपयोग करना होगा.
मौसम और निर्णय लेने का प्रशिक्षण
DGCA ने नोट किया कि मौसम संबंधी दुर्घटनाओं में अक्सर खराब निर्णय जिम्मेदार होते है, न कि मौसम की अप्रत्याशितता. ऑपरेटरों को वास्तविक समय मौसम अपडेट सिस्टम स्थापित करना होगा और SOPs का सख्ती से पालन करना होगा. पायलटों को बार-बार मौसम जागरूकता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने के प्रशिक्षण दिए जाएंगे.
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि DGCA के ये कदम देश में विमानन सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकते हैं. ऑपरेटरों की जवाबदेही तय करने और पारदर्शिता बढ़ाने से यात्रियों का भरोसा भी मजबूत होगा.
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