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रांची/डेस्क: समाज में जहां आज भी तलाक को एक ‘दाग’ और ‘हार’ के रूप में देखा जाता है, वहीं मेरठ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सोच बदलने की पहल कर दी हैं. यहां एक रिटायर्ड जज पिता ने अपनी बेटी के तलाक को दुख नहीं, बल्कि उसकी आजादी और नई जिंदगी की शुरुआत मानते हुए ऐसा स्वागत किया, जिसे देखकर हर कोई भावुक भी हो रहा है और प्रेरित भी.
कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर में रहने वाले उत्तराखंड कैडर के रिटायर्ड जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी इकलौती बेटी के घर लौटने को एक जश्न में बदल दिया. जैसे ही बेटी कोर्ट से तलाक के कागज लेकर घर पहुंची, ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ उसका स्वागत किया गया. परिवार के लोग सड़क पर नाचते-गाते नजर आए, फूल बरसाए गए और मिठाइयां बांटकर इस पल को खास बना दिया गया. इस पूरे स्वागत समारोह की सबसे खास बात यह रही कि परिवार के सभी सदस्यों ने ब्लैक टी-शर्ट पहन रखी थी, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा था- “I Love My Bitiya”. यह संदेश सिर्फ एक बेटी के लिए प्यार नहीं, बल्कि समाज को एक बड़ा संदेश भी दे रहा था कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि परिवार की सबसे बड़ी ताकत होती हैं.
जानकारी के अनुसार, डॉ. शर्मा ने करीब आठ साल पहले अपनी बेटी की शादी एक आर्मी मेजर के साथ बड़े धूमधाम से की थी लेकिन शादी के बाद बेटी को ससुराल में प्रताड़ना और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा. हालात इतने बिगड़ गए कि रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया. लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार शनिवार को कोर्ट से तलाक मंजूर हुआ.
इस मौके पर डॉ. शर्मा ने जो कहा, उसने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया. उनका कहना था कि अगर उनकी बेटी शादी के बाद खुश नहीं थी, तो उसे खुश रखना उनका सबसे बड़ा कर्तव्य हैं. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने न तो किसी तरह की एलिमनी ली और न ही कोई सामान, बल्कि सिर्फ अपनी बेटी को वापस घर लाना ही उनके लिए सबसे बड़ी बात थी.
आज भी कई जगहों पर तलाकशुदा महिलाओं को समाज में तिरस्कार की नजर से देखा जाता है, लेकिन मेरठ की यह घटना उस सोच को चुनौती देती हैं. सोशल मीडिया पर इस अनोखे स्वागत के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही है और लोग इस पिता की सोच और हिम्मत की जमकर तारीफ कर रहे हैं.
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