धरी रह गयी दीदी की 'दादागीरी', चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में शुरू कर दिया SIR

धरी रह गयी दीदी की 'दादागीरी', चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में शुरू कर दिया SIR

धरी रह गयी दीदी की दादागीरी चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में शुरू कर दिया sir

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विशेष मतदाता पुनरीक्षण को लेकर आन्दोलन करने की चेतावनी धरी की धरी रह गयी है. निर्वचान आयोग ने पश्चिम बंगाल में  विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) कार्य शुरू कर दिया है. बता दें कि ममता बनर्जी ने दावा किया था कि वह पश्चिम बंगाल में एसआईआर नहीं होने देंगी. उन्होंने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर आन्दोलन करने की चेतावनी भी दी थी. लेकिन उनकी इस चेतावनी का असर निर्वाचन आयोग पर नहीं हुआ और उसने आज से राज्य में सुरक्षा के इन्तजाम के बीच एसआईआर प्रक्रिया शुरू कर दी है. निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यों में लगे बीएलओ की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा इन्तजाम किये हैं। 

निर्वाचन आयोग 12 राज्यों में कहा रहा है एसआईआर

बता दें कि होल में चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में विशेष मतदाता पुनरीक्षण कार्य की घोषणा की थी. बिहार में एसआईआर प्रक्रिया खत्म होने के बाद निर्वाचन आयोग ने घोषणा की थी कि एसआईआर पूरे देश का होगा. उसके बाद उसने 12 राज्यों के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दूसरे चरण का ऐलान किया. दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर हो रहा है. ये 12 राज्य वे राज्य हैं जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होना है. बता दें कि एसआईआर प्रक्रिया 4 नवंबर यानी आज से शुरू होकर 4 दिसंबर तक चलेगी. इसके बाद शुद्धीकरण के लिए मतदाता सूची का मसौदा 9 दिसंबर को प्रकाशित किया जाएगा. फिर फाइनल मतदाता सूची 7 फरवरी को जारी की जाएगी.

बीएलओ के लिए सुरक्षा के इंतजाम की मांग

विशेष मतदाता पुनरीक्षण कार्य का जिम्मा बीएलओ और अन्य चुनाव अधिकारियों का होता है. ये अधिकारी घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने वाले हैं. चुनाव आयोग की सबसे बड़ी चिंता इन अधिकारियों की सुरक्षा की है. पश्चिम बंगाल ‘सीईओ ने सभी जिलाधिकारियों के साथवर्चुअल बैठक कर उन्हें एसआईआर की औपचारिक शुरुआत होने की जानकारी भी दी है और बता चुनाव प्रक्रिया को लेकर ज़रूरी निर्देश भी दे दिये हैं. साथ ही बीएसओ समेत चुनाव आधिकारियों की सुरक्षा प्रदान करने का भी निर्देश दिया है.

पश्चिम बंगाल में एसआईआर करना कठिन क्यों?

पश्चिम बंगाल में 2002 में किये गए एसआईआर के आधार पर मतदाताओं का सत्यापन होना है. लेकिन दूसरे राज्यों की तुलना में पश्चिम बंगाल में यह कार्य करना कठिन माना जा  रहा है. इसका कारण है कि राज्य की मुखिया ममता बनर्ज शुरू से ही इसका विरोध कर रही हैं. यहां तक कि उन्होंने आज ही एसआईआर के विरोध में सड़कों पर उतर कर आन्दोलन करने की चेतावनी दी थी. चूंकि पश्चिम बंगाल में इससे पहले जांच एजेंसियों तक को किसी प्रकार की जांच आदि करने में न सिर्फ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, बल्कि उन पर कई बार हमले भी हो चुके हैं. इसलिए चुनाव आयोग एसआईआर के काम में लगे अपने अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है. 

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