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रांची/डेस्क: महाराष्ट्र के सातारा तालुका स्थित आरे-दरे गांव से एक ऐसी मार्मिक खबर सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी. जिस घर में नई जिंदगी के स्वागत की तैयारियां चल रही थी, उसी घर से कुछ ही घंटों बाद भारतीय सेना के जवान की अंतिम यात्रा निकली. खुशियों और मातम का ऐसा टकराव शायद ही किसी ने पहले देखा हो.
छुट्टी पर घर आए थे, पिता बनने का सपना था
भारतीय सेना में तैनात जवान प्रमोद जाधव कुछ समय पहले ही छुट्टी लेकर घर लौटे थे. वजह बेहद खास थी उनकी पत्नी गर्भवती थी और परिवार में जल्द ही नन्हे मेहमान के आने की उम्मीद थी. वर्दी से दूर, घर की चौखट पर कदम रखते ही प्रमोद एक फौजी नहीं, बल्कि एक पति, एक बेटा और जल्द पिता बनने वाले इंसान थे. घर में उम्मीदें थी, मुस्कान थी और भविष्य के सपने थे.
एक हादसा और सब कुछ खत्म
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. एक सड़क दुर्घटना में प्रमोद जाधव की मौत हो गई. जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, किसी को यकीन नहीं हुआ. लोगों को उम्मीद थी कि यह कोई अफवाह होगी, लेकिन जब सेना की गाड़ी गांव में दाखिल हुई, तो सच्चाई ने सबको तोड़ दिया. मां बेसुध हो गई, पिता की आंखों के सामने अंधेरा छा गया और गर्भवती पत्नी पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. दर्द की इंतहा तब हो गई, जब प्रमोद जाधव के निधन के कुछ ही घंटों बाद उनकी पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया. एक तरफ जीवन की पहली किलकारी, दूसरी तरफ मौत की खामोशी. जिस पल को परिवार की सबसे बड़ी खुशी होना था, वही पल सबसे गहरे जख्म के साथ आया. प्रमोद पिता तो बन गए, लेकिन अपनी बेटी का चेहरा देखने का सौभाग्य उन्हें नहीं मिला.
तिरंगे में लिपटा बेटियों का सपना
अंतिम संस्कार के दिन आरे-दरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था. तिरंगे में लिपटा प्रमोद जाधव का पार्थिव शरीर जब गांव पहुंचा, तो हर आंख भर आई. भारतीय सेना ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी.
सबसे हृदयविदारक दृश्य
अंतिम दर्शन के दौरान वह पल सबसे ज्यादा दर्दनाक था, जब अस्पताल से सीधे स्ट्रेचर पर लाई गई प्रमोद की पत्नी अपने पति को आखिरी बार देखने पहुंची. कमजोर शरीर, थकी हुई आंखें और टूटे सपने वह दृश्य हर किसी के दिल को चीर गया. इसके बाद महज आठ घंटे पहले जन्मी नवजात बच्ची को भी उसके पिता के अंतिम दर्शन के लिए लाया गया. नन्ही-सी बच्ची अपने नुकसान से अनजान थी, लेकिन वहां मौजूद हर व्यक्ति जानता था कि इस खालीपन की भरपाई कभी नहीं हो सकती. सेना की सलामी के बीच गांव में ऐसा सन्नाटा था, जो बहुत कुछ कह रहा था. मां की सूनी गोद, पिता की झुकी निगाहें, पत्नी का उजड़ा संसार और गोद में एक ऐसी बेटी जिसके सिर से जन्म लेते ही पिता का साया उठ गया.
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