असम में अंतर-धार्मिक जमीन हस्तांतरण पर सख्ती, नई SOP लागू, सीधे तौर पर हिन्दू की...

असम में अंतर-धार्मिक जमीन हस्तांतरण पर सख्ती, नई SOP लागू, सीधे तौर पर हिन्दू की जमीन नही खरीद पाएंगे मुस्लिम

असम में अंतर-धार्मिक जमीन हस्तांतरण पर सख्ती नई sop लागू सीधे तौर पर हिन्दू की जमीन नही खरीद पाएंगे मुस्लिम 

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
असम सरकार ने राज्य को “संवेदनशील” बताते हुए अंतर-धार्मिक जमीन हस्तांतरण के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू कर दी है. इसके तहत अब अलग-अलग धर्मों के बीच जमीन की खरीद-बिक्री, दान या किसी भी तरह का हस्तांतरण सीधे रजिस्ट्री के माध्यम से नहीं हो सकेगा. ऐसे हर सौदे की बहुस्तरीय जांच होगी, जिसमें असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच की भूमिका अहम होगी.

यह SOP 27 अगस्त 2025 को असम कैबिनेट से मंजूरी के बाद लागू की गई थी. CMहिमंता बिस्वा सरमा ने इसे “सामाजिक संतुलन, पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा” के लिहाज से जरूरी बताया है. जनवरी 2026 तक यह प्रक्रिया पूरी तरह लागू हो चुकी है और कई लंबित मामलों का निपटारा इसी व्यवस्था के तहत किया जा रहा है.

सरकार का तर्क और उद्देश्य
मुख्यमंत्री सरमा ने इस फैसले को “लैंड जिहाद” और संभावित जनसांख्यिकीय बदलावों को रोकने से जोड़ा है. उनका कहना है कि असम जैसे संवेदनशील राज्य में जमीन से जुड़े सौदों को बेहद सावधानी से संभालने की जरूरत है, ताकि धोखाधड़ी, जबरन बिक्री और सामाजिक ताने-बाने पर नकारात्मक असर को रोका जा सके.

हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह किसी के संवैधानिक अधिकारों को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकती. जमीन बेचने या खरीदने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन अंतर-धार्मिक मामलों में अब पूर्व अनुमति और विस्तृत जांच अनिवार्य कर दी गई है, जिससे प्रक्रिया अधिक जटिल और समय लेने वाली हो गई है.

जांच की चरणबद्ध प्रक्रिया
नई SOP के तहत खरीदार और विक्रेता को सबसे पहले Sub-Divisional Officer (SDO) के पास आवेदन देना होगा. यदि सौदा एक ही धर्म के लोगों के बीच है, तो सामान्य दस्तावेजी जांच के बाद रजिस्ट्री हो जाएगी. लेकिन अगर लेनदेन अलग-अलग धर्मों के बीच है, तो मामला Deputy Commissioner (DC) के पास भेजा जाएगा.

इसके बाद DC, Revenue Department के नोडल अधिकारी के माध्यम से असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच से जांच कराएगा. जांच में जमीन के दस्तावेजों की वैधता, खरीदार के फंडिंग स्रोत, इलाके के सामाजिक ताने-बाने पर संभावित प्रभाव, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम और यह भी देखा जाएगा कि बिक्री स्वैच्छिक है या किसी दबाव अथवा धोखाधड़ी का परिणाम. स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट के आधार पर DC अंतिम फैसला लेगा. कुछ अत्यंत संवेदनशील मामलों में मुख्यमंत्री स्तर की मंजूरी भी आवश्यक हो सकती है.

बाहरी NGOs पर भी नजर
यह SOP असम के बाहर से आने वाले NGOs पर भी लागू होगी, जो राज्य में शैक्षणिक या स्वास्थ्य संस्थानों के लिए जमीन खरीदना चाहते हैं. मुख्यमंत्री ने केरल स्थित कुछ NGOs का उल्लेख करते हुए कहा कि वे बारपेटा, श्रीभूमि और कछार जैसे जिलों में जमीन खरीद रहे हैं, जो भविष्य में सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय हो सकता है. हालांकि असम में पंजीकृत NGOs को इससे छूट दी गई है.

विवाद और विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस, AIUDF और CPMने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है. उनका आरोप है कि यह संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा मिलेगा. विपक्ष का कहना है कि यह नीति अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाती है.

सरकार का तर्क है कि यह कदम असम समझौते के क्लॉज 6 और स्वदेशी लोगों की जमीन की सुरक्षा से जुड़ा है. वहीं आलोचकों का मानना है कि सख्त जांच व्यवस्था व्यावहारिक रूप से एक “प्रभावी रोक” की तरह काम कर सकती है.

फिलहाल यह SOP केवल असम तक सीमित है. देशभर में ऐसा कोई धर्म-आधारित राष्ट्रीय कानून नहीं है, हालांकि कुछ राज्यों में बाहरी लोगों के लिए कृषि भूमि पर प्रतिबंध मौजूद हैं. असम सरकार के इस मॉडल को आने वाले समय में अन्य राज्य अपनाते हैं या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं.

ये भी पढ़ें- BREAKING: झारखंड पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ ED ने हाईकोर्ट से की CBI जांच की मांग

 

संबंधित सामग्री

तमाड़ में देवर को भाभी ने पिला दी जहर वाली चाय, देवर की मौत भाभी और उसके पति गिरफ्तार

झारखंड

तमाड़ में देवर को भाभी ने पिला दी जहर वाली चाय, देवर की मौत भाभी और उसके पति गिरफ्तार

पटना पुलिस ने 32 लाख रुपये किए बरामद, दो बाइक सवार युवक गिरफ्तार

बिहार

पटना पुलिस ने 32 लाख रुपये किए बरामद, दो बाइक सवार युवक गिरफ्तार

सोनाहातु के जामुदाग में MDA कार्यक्रम का हुआ उद्घाटन, फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर चला जागरूकता अभियान

झारखंड

सोनाहातु के जामुदाग में MDA कार्यक्रम का हुआ उद्घाटन, फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर चला जागरूकता अभियान

धनबाद में किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. मिहिर कुमार को जान से मारने की धमकी, क्लिनिक के बाहर चिपका मिला पत्र

झारखंड

धनबाद में किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. मिहिर कुमार को जान से मारने की धमकी, क्लिनिक के बाहर चिपका मिला पत्र

केंचकी महोत्सव क़ो मंजूरी दिलाने पर जीप सदस्य नें मुख्यमंत्री और विधायक का जताया आभार

झारखंड

केंचकी महोत्सव क़ो मंजूरी दिलाने पर जीप सदस्य नें मुख्यमंत्री और विधायक का जताया आभार