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रांची/डेस्क: दुनिया में जहां सुबह की शुरुआत सूरज की पहली किरण से होती है, वहीं नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीप पर बसा लॉन्गइयरबायेन शहर बिल्कुल अलग हकीकत जीता हैं. यहां हर साल नवंबर से फरवरी तक करीब चार महीने सूरज नजर ही नहीं आता. विज्ञान की भाषा में इस दौर को पोलर नाइट कहा जाता हैं. इस दौरान करीब 3000 घंटे तक शहर घने अंधेरे में डूबा रहता है और करीब 2,500 लोग बिना सूरज देखे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीते हैं.
घड़ी से चलता है दिन, सूरज से नहीं
यहां सुबह, दोपहर और रात में फर्क करना मुश्किल होता हैं. दफ्तर जाना हो या लंच ब्रेक, हर वक्त बाहर आसमान में अंधेरा और तारे नजर आते हैं. ऐसे में लोगों की दिनचर्या सूरज नहीं, बल्कि घड़ी के समय से तय होती हैं. शरीर और दिमाग को संतुलित रखने के लिए लोग विटामिन-डी सप्लीमेंट्स और खास लाइट थेरेपी लैंप का इस्तेमाल करते है ताकि शरीर को दिन का एहसास हो सके.
अंधेरे से जंग नहीं, दोस्ती करते है लोग
लगातार अंधेरे में रहने से चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता हैं. इससे निपटने के लिए यहां के लोग एक खास जीवन-दर्शन अपनाते है, जिसे वे कोसेलिग कहते हैं. यह हमारी ‘सुकून’ की भावना जैसा हैं. घरों में मोमबत्तियां जलती है, गर्म कॉफी की खुशबू रहती है और ऊनी कंबलों के बीच लोग अंधेरे को कोसने के बजाय उसे उत्सव की तरह जीते हैं.
कम्युनिटी ही सबसे बड़ी ताकत
लॉन्गइयरबायेन में करीब 50 अलग-अलग देशों के लोग रहते है, जो रिसर्च और माइनिंग जैसे कामों से जुड़े हैं. इतनी विविधता के बावजूद यहां का सामाजिक जुड़ाव बेहद मजबूत हैं. अंधेरे के महीनों में यहां की सोशल लाइफ और भी सक्रिय हो जाती हैं. सामूहिक भोज, बोर्ड गेम्स, संगीत और कहानियों की शामें लोगों को अकेलेपन से दूर रखती हैं.
नॉर्दर्न लाइट्स बनी रात की सैर
जहां दुनिया के लिए नॉर्दर्न लाइट्स एक अजूबा है, वहीं यहां के लोगों के लिए यह रोजमर्रा की खुशी हैं. लोग स्नोमोबाइल पर सवार होकर नीली बर्फ की वादियों में इन रंगीन रोशनियों को देखने निकल पड़ते हैं. अंधेरे को तोड़ने के लिए पोलर जैज जैसे म्यूजिक फेस्टिवल भी आयोजित किए जाते हैं, ताकि शहर का सन्नाटा संगीत में बदल जाए.
अंधेरे में सुरक्षा सबसे जरूरी
इस द्वीप पर जिंदगी सिर्फ ठंड से ही नहीं, बल्कि खतरे से भी जुड़ी हैं. यहां तापमान माइनस 30 डिग्री तक चला जाता है और इंसानों से ज्यादा पोलर भालू पाए जाते हैं. इसलिए बाहर निकलते समय हेडलाइट्स, रिफ्लेक्टिव जैकेट और पूरी सतर्कता जरूरी होती हैं. अजनबियों का एक-दूसरे को ‘हेलो’ कहना यहां आम है, क्योंकि इस अंधेरे में हर इंसान दूसरे का सहारा बनता हैं.
जब लौटती है पहली किरण, मनता है उत्सव
फरवरी के अंत में जब पहली बार सूरज की किरण शहर के एक पुराने अस्पताल की सीढ़ियों पर पड़ती है, तो पूरा शहर वहां इकट्ठा होकर सोलफेस्टुका मनाता हैं. हफ्तों के इंतजार के बाद आई वह एक किरण लोगों की आंखें नम कर देती हैं. यह पल याद दिलाता है कि अंधेरा चाहे कितना ही लंबा क्यों न हो, उजाला लौटकर जरूर आता हैं.
अंधेरे से मिली बड़ी सीख
स्वालबार्ड की यह काली रात दुनिया को सिखाती है कि खुशियां हालात की मोहताज नहीं होती. जहां हम छोटी परेशानियों से टूट जाते है, वहीं यहां के लोग चार महीने के अंधेरे को साथ, प्यार और उत्सव में बदल देते हैं. यह द्वीप सिर्फ डूम्सडे वॉल्ट के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी खास है, जिन्होंने प्रकृति की सबसे कठिन चुनौती को अपनी जीवनशैली बना लिया हैं.
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