20 साल का थर्मस बना मौत का पैगाम, रोज की एक आदत ने छीनी ली जिंदगी

20 साल का थर्मस बना मौत का पैगाम, रोज की एक आदत ने छीनी ली जिंदगी

20 साल का थर्मस बना मौत का पैगाम रोज की एक आदत ने छीनी ली जिंदगी

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
ताइवान में सामने आई एक हैरान कर देने वाली घटना ने लोगों को रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों की सुरक्षा पर सोचने को मजबूर कर दिया हैं. करीब 50 साल का एक व्यक्ति, जो पिछले 30 वर्षों से बिना किसी हादसे के गाड़ी चला रहा था, एक दिन अचानक अपनी कार पर नियंत्रण खो बैठा. न ब्रेक लगे, न मोड़ कटा कार सीधी एक दुकान में जा घुसी. शुरुआत में इसे सामान्य सड़क हादसा माना गया, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो सच्चाई बेहद डरावनी निकली.

डॉक्टरों को दिखे गंभीर लक्षण
हादसे के बाद जब शख्स को अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टरों को उसके शरीर में कई असामान्य लक्षण नजर आए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके दिमाग के एक हिस्से में सिकुड़न, खून की कमी, किडनी पर असर और लगातार बनी रहने वाली थकान पाई गई. इतना ही नहीं, उसकी स्वाद पहचानने की क्षमता भी कमजोर हो चुकी थी. उसे हमेशा लगता था कि खाने में नमक कम हैं.

खून की रिपोर्ट ने खोला राज
डॉक्टरों को शक हुआ कि इन सभी लक्षणों की जड़ एक ही हो सकती हैं. खून की जांच कराई गई, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ उसके शरीर में लेड (सीसा) की मात्रा सामान्य से कई गुना ज्यादा थी. अब सवाल उठने लगा कि आखिर इतना जहर उसके शरीर में गया कैसे. जांच आगे बढ़ी तो वजह सामने आई. वह व्यक्ति पिछले करीब 20 सालों से रोजाना एक ही थर्मस में कॉफी पीता था. समय के साथ उस थर्मस की अंदरूनी धातु की परत खराब हो चुकी थी और उसमें जंग लग गई थी. गर्म और अम्लीय कॉफी उस परत को धीरे-धीरे घिसती रही, जिससे लेड कॉफी में मिलकर उसके शरीर में जाता रहा. सालों तक रोज थोड़ी-थोड़ी मात्रा में यह ज़हर जमा होता गया और उसे इसका अंदाजा तक नहीं हुआ.

डॉक्टर ने टीवी शो में समझाया पूरा मामला
ताइवान के मशहूर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हांग योंग-शियांग ने इस पूरे केस को एक टीवी शो में विस्तार से समझाया. उन्होंने बताया कि लंबे समय तक लेड के संपर्क में रहने से व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक सेहत दोनों पर गंभीर असर पड़ता हैं. इस मरीज में भी याददाश्त कमजोर होने लगी थी, निगलने में परेशानी होने लगी थी और धीरे-धीरे हालत बिगड़ती चली गई.

एक साल बाद हुई मौत
डॉक्टरों के मुताबिक, इसी दौरान उसे एस्पिरेशन निमोनिया भी हो गया. कार हादसे के करीब एक साल बाद उसकी मौत हो गई. यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. कई लोग हैरान थे कि कोई एक ही थर्मस को 20 साल तक कैसे इस्तेमाल कर सकता है, वहीं कई यूजर्स ने इसे रोजमर्रा की चीजों में छिपे खतरों की चेतावनी बताया.

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