न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
राहुल कुमार / शेरघाटी - मासूम हंसी की गूंज जहां कल तक गांव की गलियों में सुनाई देती थी, आज वहीं सन्नाटा पसरा है। शेरघाटी प्रखंड के योगापुर गांव में वज्रपात ने तीन नन्हीं जिंदगियों को पल भर में छीन लिया। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। हर आंख नम है, हर दिल भारी। इसी बीच, इस गहरे दुख के बीच प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवारों तक राहत पहुंचाने का प्रयास किया है।
हाईलाइट्स -
- वज्रपात से तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत
- प्रशासन ने 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि सौंपी
- सीओ उषा कुमारी की संवेदनशील पहल की सराहना
- मंत्री संतोष सुमन ने गांव पहुंचकर जताई संवेदना
वज्रपात में बुझ गईं तीन जिंदगियां
बीते सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली और तेज गर्जना के साथ गिरी बिजली ने तीन मासूम बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में तीनों बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ परिवारों को, बल्कि पूरे गांव को अंदर तक झकझोर कर रख दिया। अब भी गांव में मातम का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

प्रशासन की तत्परता, तुरंत मिली आर्थिक सहायता
बुधवार को प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए राज्य आपदा राहत कोष से पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा। अंचल अधिकारी उषा कुमारी स्वयं गांव पहुंचीं और अपने हाथों से परिजनों को चेक सौंपा। इस दौरान उनका व्यवहार बेहद मानवीय और संवेदनशील रहा, जिसकी ग्रामीणों ने खुलकर सराहना की।

दुख की घड़ी में सरकार आपके साथ – उषा कुमारी
अंचल अधिकारी उषा कुमारी ने कहा कि सरकार के प्रावधानों के तहत त्वरित सहायता उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस कठिन समय में प्रशासन हर संभव मदद के लिए तैयार है। ग्रामीणों ने बताया कि कागजी प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर इतनी जल्दी मुआवजा मिलना प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है।
मंत्री संतोष सुमन ने जताई गहरी संवेदना
घटना की सूचना मिलते ही बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन भी गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और कहा कि यह घटना बेहद दुखद है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि खराब मौसम के दौरान सतर्क रहें।

अब भी सदमे में योगापुर, आंखों में आंसू थमे नहीं
घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद गांव में सन्नाटा और दर्द साफ महसूस किया जा सकता है। हर घर में बस उसी हादसे की चर्चा है। परिजनों के आंसू अब भी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से मिली त्वरित राहत ने थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन अपनों के खोने का दर्द कभी कम नहीं हो सकता।
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