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बिहार/डेस्क: बिहार के नवादा जिले में अग्रवाल समाज की अनूठी परंपरा ने एक बार फिर सबका ध्यान खींचा. हजारों लोग पूरे परिवार सहित एकत्र हुए और जिले के सबसे प्रमुख स्थान सब्जी बाजार में सामूहिक होलिका दहन किया. यह परंपरा 100 वर्षों से अधिक पुरानी है और नवादा में अग्रवाल समाज का एकमात्र ऐसा बड़ा सामूहिक आयोजन माना जाता है.
परंपरा की खासियत
समाज के लोग अपने-अपने घरों से निकलकर एक साथ इकट्ठा होते है. सबसे पहले विधि-विधान से होलिका पूजन किया जाता है मंत्रोच्चारण, आरती, गेहूं की बालियां, मिष्ठान और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है. महिलाएं पारंपरिक लाल जोड़े या वेशभूषा में विशेष रूप से भाग लेती है. पूजा सब्जी बाजार में होलिका दहन होता है, जहां होलिका दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाता है. दहन के बाद लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते है, गले मिलते है और होली की बधाइयां देते है. यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, भाईचारे और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करता है.
सामाजिक महत्व
अग्रवाल समाज के वरिष्ठजन राजकुमार अग्रवाल बताते है कि यह परंपरा व्यापारिक समृद्धि, परिवार की सुख-शांति और समाज की एकजुटता का प्रतीक है. पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाई जा रही यह रीत नवादा की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा बन चुकी है. अन्य स्थानों पर होलिका दहन अलग-अलग रूपों में होता है, लेकिन अग्रवाल समाज का यह सामूहिक कार्यक्रम अपनी विशिष्टता के लिए प्रसिद्ध है. इस साल भी बाजार क्षेत्र में भारी भीड़ और उत्साह देखने को मिला। होलिका दहन के बाद रंगों की होली खेलने की तैयारियां शुरू हो गई.
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