न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: पटना की सड़कों पर अब सिर्फ ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों का ही नहीं, बल्कि गंदगी फैलाने वालों का भी 'डिजिटल चालान' कटेगा। पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड एक हाईटेक प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत कचरा फेंकने वालों की पहचान AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कैमरों के जरिए की जाएगी। इस मुहिम को 'नगर नेत्र' नाम दिया गया है।
4K कैमरों से लैस इलेक्ट्रिक बाइक्स का घेरा
पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों की निगरानी के लिए 19 विशेष इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर गाड़ियां खरीदी जा रही हैं।
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इन गाड़ियों पर 4K रेजोल्यूशन वाले डैशकैम लगे होंगे, जो 110 डिग्री के वाइड एंगल पर हर हलचल को रिकॉर्ड करेंगे।
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जीपीएस (GPS) तकनीक की मदद से कंट्रोल रूम को हर समस्या की सटीक लोकेशन मिल जाएगी।
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डेटा ट्रांसफर के लिए 5G सिम और हाई-स्पीड वाई-फाई का इस्तेमाल होगा।
AI इंजन खुद तैयार करेगा रिपोर्ट और चालान
यह सिस्टम इतना एडवांस है कि इसे इंसानी दखल की जरूरत कम पड़ेगी। ICCC भवन में स्थापित 'सेंट्रल सिविक सर्विसेज ऑपरेशंस सेंटर' (C-SOC) में लगा स्मार्ट AI इंजन डेटा का विश्लेषण करेगा।
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अगर सड़क पर 1 मीटर से बड़ा कचरे का ढेर या 10 इंच से बड़ा गड्ढा दिखा, तो सिस्टम तुरंत स्क्रीनशॉट लेकर रिपोर्ट बना देगा।
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यदि कहीं अवैध होर्डिंग मिली, तो सिस्टम खुद ही चालान की राशि की गणना कर अधिकारियों को डैशबोर्ड पर अलर्ट भेज देगा।
कचरे के साथ-साथ गड्ढों और लावारिस पशुओं पर भी नज़र
नगर नेत्र प्रोजेक्ट सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं है। ये गाड़ियां सड़कों की स्क्रीनिंग करते समय निम्नलिखित समस्याओं को भी चिह्नित करेंगी:
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खुले मैनहोल और खराब स्ट्रीट लाइट।
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सड़क पर घूमने वाले लावारिस पशु।
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अवैध कब्जे और टूटे हुए डिवाइडर।
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धुंधली पड़ चुकी रोड मार्किंग और टूटे पेवर ब्लॉक।
8.95 करोड़ का बजट और 2026 तक का लक्ष्य
पटना स्मार्ट सिटी इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट पर 8.95 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसे नवंबर 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है। इस प्रोजेक्ट को चलाने के लिए 27 विशेषज्ञों की टीम तैनात रहेगी। चार्जिंग के लिए विशेष हब बनाए जाएंगे और अगले 3 साल तक एजेंसी ही इसका रखरखाव करेगी।