न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
साकेत कुमार ( संवाददाता ) / पटना: बिहार में वर्ष 2016 से लागू शराबबंदी कानून को करीब एक दशक पूरा होने को है, लेकिन इसके समानांतर एक नई और खतरनाक समस्या तेजी से उभरकर सामने आ रही है—“सूखा नशा”। राजधानी पटना के मंदिरी इलाके से सामने आई तस्वीरें और स्थानीय लोगों के बयान इस बात की गवाही देते हैं कि नशे का स्वरूप बदल चुका है और अब युवा वर्ग तेजी से इंजेक्शन, ड्रग्स, ब्राउन शुगर और अन्य मादक पदार्थों की गिरफ्त में आता जा रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान इलाके के एक जर्जर और परित्यक्त मकान का मंजर बेहद चिंताजनक मिला। चारों तरफ फैले कचरे के बीच बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन, टूटी शीशियां, तंबाकू के पैकेट, माचिस और शराब की खाली बोतलें पड़ी मिलीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मकान अब नशा करने वालों का “हब” बन चुका है, जहां दिन-रात युवक जुटते हैं और नशे का सेवन करते हैं।
हाईलाइट्स
- पटना के मंदिरी इलाके में जर्जर मकान बने सूखा नशा का अड्डा
- इंजेक्शन, ड्रग्स, ब्राउन शुगर और शराब की बोतलों के मिले सबूत
- स्थानीय लोगों का दावा—युवा वर्ग तेजी से नशे की गिरफ्त में
- शराबबंदी के बाद सूखा नशा बढ़ने की उठी बहस
- प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद अवैध कारोबार जारी
- सामाजिक जागरूकता और सख्त कार्रवाई की मांग तेज
युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा प्रभावित
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस सूखे नशे का सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग पर पड़ रहा है। “अच्छे-अच्छे घरों के लड़के भी अब सुई और ड्रग्स के चक्कर में पड़ गए हैं,” एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि नशे की लत में पड़े युवक चोरी, छिनतई और हिंसा जैसे अपराधों तक करने से नहीं हिचकते।
कुछ स्थानीय बच्चों ने भी कैमरे के सामने बताया कि उनके दोस्त और यहां तक कि परिवार के सदस्य भी नशे की गिरफ्त में हैं। बच्चों का कहना था कि वे अपने दोस्तों को रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे नहीं मानते। “हम मना करते हैं, लेकिन वो नहीं सुधरते,” एक बच्चे ने कहा।
खतरे का अड्डा बना जर्जर मकान
जिस मकान की तस्वीरें सामने आई हैं, उसकी हालत बेहद खराब है। टूटी हुई दीवारें, उखड़े हुए ग्रिल और हर तरफ गंदगी का अंबार—यह जगह किसी भी समय हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मकान के अंदर जाना भी मुश्किल है, क्योंकि वहां इतनी बदबू और गंदगी है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
लोगों के मुताबिक, यह जगह सिर्फ नशा करने के लिए ही नहीं, बल्कि नशे के सामान की सप्लाई के लिए भी इस्तेमाल होती है। “यहां हर तरह का सामान मिल जाता है, इंजेक्शन से लेकर ड्रग्स तक,” एक स्थानीय निवासी ने बताया।
खतरे का अड्डा बना जर्जर मकान ।
प्रशासन की मौजूदगी, लेकिन असर सीमित
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन इलाके में आता-जाता रहता है, लेकिन जैसे ही पुलिस या प्रशासनिक टीम वहां से हटती है, नशे का कारोबार फिर से शुरू हो जाता है। “प्रशासन रोज आती है, लेकिन कुछ कर नहीं पाती,” एक व्यक्ति ने कहा।लोगों का यह भी कहना है कि नशे के कारोबारी इतनी चालाकी से काम करते हैं कि उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है। वे गली-गली में छिपकर कारोबार करते हैं और प्रशासन के आने की भनक लगते ही गायब हो जाते हैं।
शराबबंदी के बाद बढ़ा सूखा नशा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या शराबबंदी के बाद सूखे नशे का चलन बढ़ा है? कई स्थानीय लोगों का मानना है कि शराबबंदी के बाद ही यह समस्या ज्यादा गंभीर हुई है। एक निवासी ने कहा, “पहले लोग शराब पीते थे, लेकिन अब जब शराब पर रोक है तो लोग ड्रग्स और इंजेक्शन की तरफ जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि पहले लोग अपनी कमाई का एक हिस्सा शराब पर खर्च करते थे, लेकिन अब पूरी कमाई नशे में झोंक दे रहे हैं। हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि शराबबंदी पूरी तरह लागू नहीं है और चोरी-छिपे शराब आज भी उपलब्ध है। “अब तो शराब घर तक पहुंचाई जा रही है,” एक स्थानीय व्यक्ति ने आरोप लगाया।
शराबबंदी के बाद बढ़ा सूखा नशा।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
सूखे नशे का असर सिर्फ सामाजिक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के स्तर पर भी बेहद खतरनाक है। स्थानीय लोगों के अनुसार, युवा कम उम्र में ही दिल और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कई मामलों में मौत तक हो चुकी है।
“नए-नए लड़के हार्ट अटैक से मर रहे हैं, किडनी खराब हो रही है,” एक व्यक्ति ने चिंता जताते हुए कहा।
समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए सिर्फ कानून पर्याप्त नहीं है। सामाजिक जागरूकता और परिवार की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, “कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन समाज को भी आगे आना होगा। जब तक हम खुद अपने बच्चों को नहीं संभालेंगे, तब तक यह समस्या खत्म नहीं होगी।” साथ ही लोगों ने सरकार से मांग की है कि नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और ऐसे अड्डों को तुरंत बंद कराया जाए। कुछ लोगों ने शराबबंदी नीति की समीक्षा की भी मांग उठाई है।
भविष्य पर संकट
मंदिरी इलाके की यह तस्वीर सिर्फ एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। जिस तरह से युवा पीढ़ी नशे की ओर बढ़ रही है, वह आने वाले समय के लिए गंभीर संकट का संकेत है। अगर समय रहते इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो एक पूरी पीढ़ी इसके दुष्परिणाम झेल सकती है। प्रशासन, समाज और परिवार—तीनों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा, तभी इस “सूखे नशे” के बढ़ते जाल को तोड़ा जा सकता है।
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