दिवाकर कुमार/न्यूज़11 भारत
बिहार/डेस्क: ये मामला सफियासराय थाना क्षेत्र के डकरा पड़हम का है, जहां शनिवार की सुबह ग्रामीणों ने गंगा नदी में एक अर्थी से बंधा शव देखा. देखते ही देखते यह खबर आसपास के गांवों में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए. सूचना मिलने पर सफियासराय थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को अर्थी सहित गंगा से बाहर निकलवाया. जब शव से कपड़ा हटाया गया, तो पुलिस और मौजूद लोग दंग रह गए. शव का सिर कई हिस्सों में बंटा हुआ था और शरीर भी बुरी तरह क्षत-विक्षत अवस्था में था. काफी प्रयास के बाद पुलिस ने शव की पहचान धरहरा थाना क्षेत्र के सारोबाग निवासी 45 वर्षीय नंदकिशोर तांती के रूप में की.
पुलिस की सूचना पर मृतक के परिजन मौके पर पहुंचे. मृतक के भाई छोटे लाल, भतीजा धर्मेंद्र कुमार और पत्नी शीला देवी ने बताया कि शुक्रवार को नंदकिशोर की मौत सारोबाग हाल्ट के पास ट्रेन की चपेट में आने से हो गई थी. जीआरपी पुलिस की सूचना पर परिजन मौके पर पहुंचे थे, जहां शव बुरी हालत में पड़ा हुआ था. परिजनों का आरोप है कि जीआरपी पुलिस ने थाना की प्रक्रिया में न उलझने की बात कहते हुए शव को घर ले जाने की सलाह दी, जिसके बाद वे शव को घर ले आए. परिजन अंतिम संस्कार के लिए डकरा पड़हम गंगा घाट पहुंचे, लेकिन डर के कारण शव को जलाने की बजाय अर्थी सहित गंगा में बहा दिया. शव मिलने की सूचना के बाद सफियासराय थाना पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल मुंगेर भेज दिया. वहीं इस पूरे मामले पर जमालपुर रेल थाना अध्यक्ष स्वराज कुमार ने कहा कि सारोबाग हाल्ट के पास ट्रेन से कटकर मौत की सूचना जरूर मिली थी, लेकिन जब पुलिस मौके पर पहुंची तो शव वहां मौजूद नहीं था. उन्होंने परिजनों के लगाए आरोपों को बेबुनियाद बताया है.
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