अभिषेक राज/न्यूज11 भारत
गयाजी/डेस्क: गया जिले के गुरुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत दुब्बा गाँव स्थित पुरातात्त्विक स्थल पर आगामी मार्च माह के दूसरे सप्ताह से ऐतिहासिक उत्खनन कार्य प्रारंभ होने जा रहा है. यह उत्खनन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण की स्वीकृति के बाद शुरू किया जाएगा. इस संबंध में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विश्वविद्यालय प्रशासन ने विस्तृत जानकारी साझा की.
प्रेस वार्ता में बताया गया कि यह मगध विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार है, जब विश्वविद्यालय किसी पुरातात्त्विक स्थल पर विधिवत और स्वतंत्र रूप से उत्खनन कार्य करने जा रहा है. उल्लेखनीय है कि बीते लगभग चार दशकों से बिहार का कोई भी विश्वविद्यालय इस प्रकार का उत्खनन कार्य नहीं कर सका था. ऐसे में यह पहल राज्य के शैक्षणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में एक नई उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है.
यह उत्खनन प्राचीन भारतीय एवं एशियाई अध्ययन विभाग के विशेषज्ञ शिक्षकों के निर्देशन में किया जाएगा. टीम का नेतृत्व उत्खनन निदेशक शंकर शर्मा तथा सह-निदेशक डॉ. अलका मिश्रा करेंगी. उनके साथ डॉ. जनमेजय सिंह, आलोक रंजन, डॉ. अनूप कुमार भारद्वाज, डॉ. चंद्र प्रकाश और डॉ. विजयकांत यादव शामिल रहेंगे.
उत्खनन के माध्यम से छात्रों और शोधार्थियों को फील्ड ट्रेनिंग दी जाएगी, साथ ही मगध क्षेत्र, विशेषकर बोधगया के आसपास बिखरे पुरातात्त्विक स्थलों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा. पौराणिक और बौद्धकालीन संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों की खोज भी इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है.
उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूर्व में दुब्बा पुरास्थल का भ्रमण कर चुके हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह उत्खनन मगध की सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम देगा और गया–बोधगया क्षेत्र के इतिहास को नई दृष्टि प्रदान करेगा.
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