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पटना/डेस्क: मुंगेर जिले स्थित भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण को विश्वस्तरीय पर्यटन एवं जैव-विविधता केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. इस दिशा में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव के साथ बैठक कर विस्तृत परियोजना प्रस्ताव (डीपीआर) शीघ्र तैयार करने का निर्देश दिया है. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भीमबांध की प्राकृतिक विशेषताओं को संरक्षित रखते हुए इसे एक आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और रोजगारोन्मुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए.
परियोजना प्रस्ताव में निम्नलिखित निर्माण एवं विकास कार्यों को शामिल करने के निर्देश दिए गए
1. वन अनुभव केंद्र-सह-कार्यशाला
2. प्रशिक्षण केंद्र
3. वेलनेस सेंटर, योग ग्राम एवं आयुर्वेद केंद्र
4. इनडोर गतिविधि क्षेत्र, कैफेटेरिया/भोजनालय
5. प्रशासनिक भवन, रेस्टोरेंट एवं सभा-कक्ष
6. गरम पानी की झील
7. ट्री हाउस-सह-कॉटेज एवं व्यू प्वाइंट
8. ट्रैकिंग मार्ग एवं लैंडस्केपिंग
9. भीम-सेन कुंड
10. ऑर्किड एवं फल उद्यान
11. वॉच टॉवर / निगरानी मीनार
उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बेलाटांड़, चोरमारा, नारोकॉल, बहेरातानड़, बघेल, कुकुरझाप धाम, खड़गपुर झील और भौराकोल झील क्षेत्रों को भी विकास प्रस्ताव में शामिल किया जाए. इन क्षेत्रों के पर्यटकीय विकास से भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण की पहचान और अधिक व्यापक स्तर पर स्थापित होगी.
उन्होंने कहा कि अभ्यारण क्षेत्र में निवास करने वाले 12 से 13 हजार आदिवासियों एवं स्थानीय लोगों के रोजगार, आजीविका और समग्र विकास के लिए ठोस योजनाओं को भी परियोजना प्रस्ताव का हिस्सा बनाया जाए.
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण अपनी प्राकृतिक संपदा, गरम जलधाराओं, घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता के लिए अद्वितीय है. इसके विकास से जहां मुंगेर जिला अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाएगा, वहीं बड़े पैमाने पर रोजगार और आर्थिक विकास के अवसर भी सृजित होंगे.
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