बेगूसराय की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 'दो गज जमीन' बयान

ऐसी धाराएं लगाईं जैसे मैं आतंकवादी हूं, कोर्ट से राहत मिलने के बाद गरजे गिरिराज सिंह, रख दी विशेष मांग

गिरिगाज सिंह ।

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क 

पटना / बेगूसराय -  केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह को चर्चित 'दो गज जमीन' बयान से जुड़े मामले में सोमवार को बड़ी कानूनी राहत मिली। बेगूसराय स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान एसीजेएम प्रथम की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत को यथावत बनाए रखा। हालांकि, प्रत्येक सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से स्थायी छूट देने की मांग पर अदालत ने तत्काल फैसला नहीं सुनाया और आदेश सुरक्षित रख लिया। एक दिवसीय बेगूसराय दौरे पर पहुंचे गिरिराज सिंह स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। सुनवाई के बाद उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज मामला राजनीतिक कारणों से प्रेरित था और चुनावी माहौल में उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए अदालत के प्रति सम्मान और आभार भी व्यक्त किया।

हाईलाइट्स - 

  • 'दो गज जमीन' बयान मामले में गिरिराज सिंह को अदालत से राहत।
  • एमपी-एमएलए कोर्ट ने अग्रिम जमानत बरकरार रखी।
  • व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की मांग पर आदेश सुरक्षित।
  • गिरिराज सिंह बोले- राजनीतिक दुर्भावना से दर्ज कराया गया था केस।
  • कथित भाषण की रिकॉर्डिंग और साक्ष्यों पर बचाव पक्ष ने उठाए सवाल।

2019 के चुनावी भाषण से जुड़ा है पूरा मामला

यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक भाषण से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, 6 अप्रैल 2019 को बेगूसराय के जीडी कॉलेज परिसर में आयोजित चुनावी सभा में दिए गए भाषण को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि भाषण की कुछ टिप्पणियों से धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुईं और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका उत्पन्न हुई। तत्कालीन जिला प्रशासन के निर्देश पर नगर थाना में कांड संख्या 221/2019 दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई लंबे समय से अदालत में चल रही है। गिरिराज सिंह के अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि अब तक अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया है।

सबूतों पर उठे सवाल, धारा-205 पर फैसला बाकी

बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि जिस भाषण को आधार बनाकर मामला दर्ज किया गया, उसकी प्रमाणिक रिकॉर्डिंग न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है। इसके अलावा कथित साक्ष्यों से संबंधित सीजर लिस्ट भी उपलब्ध नहीं बताई जा रही है। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री होने के कारण गिरिराज सिंह के ऊपर कई प्रशासनिक और सरकारी जिम्मेदारियां हैं, इसलिए उन्हें हर सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दी जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-205 के तहत आवेदन दाखिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि 'दो गज जमीन' बयान को लेकर उस समय व्यापक राजनीतिक बहस छिड़ी थी और बाद में केस डायरी के गायब होने का मुद्दा भी चर्चा का विषय बना था। अब सभी की नजरें अदालत के अगले आदेश पर टिकी हैं, जिससे मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

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