बक्सर के स्कूलों में पारदर्शिता की नई पहल: अब दीवारों पर दिखेंगे शिक्षा विभाग के हेल्पलाइन नंबर, शिकायत सीधे सरकार तक
न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना- बक्सर जिले में सरकारी विद्यालयों की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक नया कदम उठाया है। अब जिले के सभी सरकारी स्कूलों की दीवारों और मुख्य प्रवेश द्वार पर शिक्षा विभाग के केंद्रीय कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के टोल-फ्री नंबर साफ और बड़े अक्षरों में लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। इस पहल का मकसद यह है कि स्कूलों में होने वाली किसी भी तरह की समस्या या अनियमितता की जानकारी सीधे उच्च स्तर तक पहुंच सके और उसके समाधान में किसी प्रकार की देरी न हो। विभाग का मानना है कि इससे स्कूलों की निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
हाईलाइट्स -
- सभी सरकारी स्कूलों में हेल्पलाइन नंबर दीवारों पर लिखना अनिवार्य
- 31 मई 2026 तक पूरा करना होगा आदेश, नहीं तो कार्रवाई तय
- शिकायत सीधे राज्य मुख्यालय तक पहुंचेगी
- शिक्षकों की लापरवाही, मिड-डे मील और सुविधाओं पर होगी निगरानी
- बिचौलिया व्यवस्था खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम
31 मई तक अनिवार्य अनुपालन, नहीं मानने पर होगी कार्रवाई
शिक्षा विभाग के प्राथमिक निदेशालय की ओर से सभी प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यह कार्य हर हाल में 31 मई 2026 तक पूरा कर लिया जाए। इसके बाद जब विभागीय स्तर पर जांच और निरीक्षण किया जाएगा, तो जिन विद्यालयों में यह नंबर अंकित नहीं पाया जाएगा, उनके प्रधानाध्यापक सहित जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि टोल-फ्री नंबर 14417 और 18003454417 को ऐसी जगह पर लिखा जाए, जहां से वह दूर से भी आसानी से पढ़ा जा सके, ताकि छात्र, अभिभावक और आम लोग बिना किसी परेशानी के अपनी शिकायत दर्ज कर सकें।
शिकायत प्रणाली को सीधे राज्य स्तर से जोड़ने की पहल
नई व्यवस्था के तहत अब छात्र और अभिभावक किसी भी समस्या को सीधे राज्य मुख्यालय तक पहुंचा सकेंगे। इसमें शिक्षकों की अनुपस्थिति, समय पर कक्षा न लगना, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता में कमी, स्कूलों में जरूरी सुविधाओं की कमी और छात्रवृत्ति, पोशाक, साइकिल व किताबों के वितरण में गड़बड़ी जैसी शिकायतें शामिल होंगी। जिला शिक्षा कार्यालय ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को लगातार स्कूलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। इस पहल से न केवल शिकायतों के दबने की संभावना खत्म होगी बल्कि बीच के बिचौलियों की भूमिका भी कमजोर होगी, जिससे पूरी शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनने की उम्मीद है।
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